जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जलसे में शरीयत से छेड़छाड़ के मुद्दा उठाते हुए जमीयत के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य मौलाना महमूद असद मदनी ने कहा कि कुरान के कानून में कयामत तक कोई बदलाव नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि मुल्क के मुसलमान हमेशा दहशतगर्दी के खिलाफ रहे हैं। मुल्क के जो हालत बन रहे हैं मुसलमानों को उससे मायूस होने की जरूरत नहीं है। बल्कि सबसे पहले हम आपसी इख्तिलाफ खत्म करें।
नगर के मोहल्ला काजीपुरा स्थित जमा मस्जिद में जमीयत उलमा-ए-हिंद की जानिब से हुए जलसे में काफी तादाद में लोगों ने शिरकत की। मौलाना सैयद असद मदनी ने कहा की मुल्क के मुसलमानों को सरकार से कोई मदद नहीं बल्कि इंसाफ चाहिए। मुसलमान हमेशा दहशतगर्दी के खिलाफ रहा है। इस्लाम में दहशतगर्दी की कोई जगह नहीं है।
अफसोस इस बात का है कि मुसलमानों को बेवजह दहशतगर्दी से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इससे मुल्क के हालात खराब होंगे। एक दूसरे का भरोसा टूटेगा। मौलाना ने नौजवानों को हिम्मत, हौसला और होश से काम लेने की सीख दी। कहा कि मायूस होने की कोई जरूरत नहीं है। पहले हम आपसी इख्तिलाफ दूर करें।
कॉमन सिविल कोड लागू किया तो विरोध किया जाएगा
तलाक
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तलाक के मसले पर कहा कि अगर कॉमन सिविल कोड लागू किया तो उसका शांतिपूर्ण तरीके से विरोध किया जाएगा। कुरान के कानून में कयामत तक कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 12 और 13 नवंबर को अजमेर शरीफ में जमीयत का 33 वां राष्ट्रीय अधिवेशन होगा। उन्होंने सभी मसलक के मानने वालों से इसमें शामिल होने की अपील की।
रामपुर शहर की जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती महबूब आलम ने जलसे को खिताब करते हुए कहा कि हमें आपसी मनमुटाव दूर सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए। जलसे में जमीयत के जिलाध्यक्ष महमूदुज्जफर रहमानी, मुफ्ती सलमान मंसूरपुरी, मौलाना जलीस अहमद, मौलाना मोहम्मद यामीन, मौलाना मोहम्मद अहसान, मुफ्ती शमीम अहमद, मौलाना जहीरुल इस्लाम, मुफ्ती अशरफ अली, मौलाना मोहम्मद जमील, मौलाना सुलेमान, मौलाना अब्दुल खालिद भी मौजूद रहे। जलसे की निजामत मौलाना मोहम्मद इरफान कासमी ने की।