महंगाई की दरों के संतोषजनक स्तर से ऊपर रहने से रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन मंगलवार, 9 अगस्त 2016 को होने वाली नीतिगत दरों की समीक्षा में ब्याज दरों को यथावत रख सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अब, जबकि सरकार ने मुद्रास्फीति का लक्ष्य 4 फीसदी तक सीमित रखा है, ऐसे में ब्याज दर में कटौती से महंगाई घटने के बजाय और बढ़ सकती है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर के रूप में राजन का तीन वर्षीय कार्यकाल आगामी सितंबर के प्रथम सप्ताह में समाप्त हो रहा है और मंगलवार को होने वाली नीतिगत दरों की समीक्षा उनकी आखिरी समीक्षा है।
ऐसा माजा जा रहा है कि अपनी आखिरी मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दर पर पुनर्विचार करने से पहले मानसूनी बारिश के प्रभाव का इंतजार कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि यह आखिरी द्विमासिक नीतिगत दरों की समीक्षा होगी जिसमें फैसला रिजर्व बैंक के गवर्नर करेंगे।
इसके बाद आगामी 4 अक्तूबर को होने वाली अगली समीक्षा में व्यापक आधार वाली छह सदस्यीय समिति यह जिम्मेदारी संभालेगी। पिछले हफ्ते सरकार ने कहा था कि रिजर्व बैंक अगले पांच साल तक खुदरा मुद्रास्फीति को चार फीसदी तक सीमित रखने पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिसके आधार पर आने वाले दिनों में ब्याज दर निर्धारित करने वाली नई समिति मौद्रिक नीति संबंधी फैसले करेगी।
देश के सबसे बड़े बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, की अध्यक्षा अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा है --हमें उम्मीद है कि नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं होगा क्योंकि सब्जियों की कीमत बढ़ रही है ... सब्जियों की कीमत घटने में कुछ समय लगेगा जबकि खरीफ मौसम की फसल बाजार में आ जाएगी।-- उल्लेखनीय है कि बीते जून में खुदरा मूल्यों पर आधारित मुद्रास्फीति की दर 5.77 फीसदी रही जो पिछले 22 महीने का उच्चतम स्तर है।
ऐसी आशंका जतायी जा रही है कि वस्तु एवं सेवा कर -जीएसटी- प्रणाली को लागू करने से शुरू में महंगाई और बढ़ेगी। लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति अपनाने के लिए आलोचना के पात्र बने राजन ने पिछले साल जनवरी से अब तक ब्याज दर में 1.5 फीसदी की कटौती की है। उसके बाद से वह बैंकों को नीतिगत दर में हुई कटौती का फायदा देने के लिए प्रेरित करते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नकद आरक्षित अनुपात -सीआरआर- में भी बदलाव नहीं किया जाएगा क्योंकि बाजार में इस समय पर्याप्त नकदी है।