सुप्रीम कोर्ट ने अपने उस फैसले में बदलाव से बुधवार को इनकार कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार को सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि वह व्यक्तिगत शिकायतों के आधार पर उस फैसले में बदलाव नहीं कर सकता, जिसे घोषित किए तकरीबन एक साल हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपना यह ऐतिहासिक फैसला पिछले साल 17 फरवरी को सुनाया था, जिसमें केंद्र को सभी सेवारत शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने को कहा गया था।
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा, हम ऐसे आवेदनों के आधार पर हमारे फैसले में जरा भी बदलाव नहीं करेंगे और वो भी लगभग एक साल बाद। हम व्यक्तिगत मामलों को देखते हुए अपने निर्णय में संशोधन नहीं कर सकते। न्यायिक अनुशासन नाम की भी कोई चीज होती है।
हालांकि, पीठ ने लेफ्टिनेंट कर्नल (सेवानिवृत्त) प्रियंवदा ए. मर्दिकार के वकील को उनकी शिकायतें सशस्त्र बल अधिकरण के समक्ष उठाने को कहा। पीठ ने रक्षा मंत्रालय की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आर. बालासुब्रमण्यम को भी पूर्व सैन्य अधिकारी की समस्या हल कराने के लिए अपने कार्यालय का उपयोग करने की सलाह दी, जिस पर उनकी तरफ से सहमति जताई गई।
पूर्व महिला अधिकारी की ओर से पेश वकील एसएस पांडे ने अदालत के समक्ष दलील दी थी कि एक ही पद पर तैनात दो अधिकारियों में से एक को स्थायी कमीशन प्रदान किया गया, जबकि दूसरी अधिकारी को यह सुविधा नहीं दी गई और बाद में वह सेवानिवृत्त हो गईं।