वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन के समापन दिवस पर भारत ने कहा कि बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार की सख्त जरूरत है और संयुक्त राष्ट्र के संबंध में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में असमर्थता की कीमत हर दिन दुनिया को चुकानी पड़ रही है।
वॉयस ऑफ ग्लोबल साउथ शिखर सम्मेलन के तीसरे संस्करण में यह मुद्दा भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उठाया। सम्मेलन में लगभग 120 से ज्यादा देशों ने भाग लिया और उनमें से अधिकतर देशों ने बहुपक्षीय संस्थानों में सुधारों की वकालत की।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शिखर सम्मेलन के विदेश मंत्रिस्तरीय सत्र में कहा, "अगर हमें बहुपक्षवाद की विश्वसनीयता को पुनर्जीवित करना है तो इसमें सुधार की सख्त जरूरत है। वास्तव में कोई भी देश इस आकलन से असहमत नहीं है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र के संबंध में इसे आगे ले जाने में असमर्थता हमें हर गुजरते दिन के साथ अधिक महंगी पड़ रही है।’’
बहुपक्षवाद को पुनर्जीवित करने का आह्वान करते हुए जयशंकर ने कहा, "यह एक निर्विवाद तथ्य है कि भले ही वैश्विक व्यवस्था को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन बहुपक्षीय क्षेत्र से समाधान नहीं निकले हैं।"
उन्होंने कहा, "सिर्फ इतना ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को जोखिम से मुक्त करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन में विविधता लाने की भी सख्त जरूरत है।" भारत संयुक्त राष्ट्र, विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष सहित बहुपक्षीय संस्थानों में सुधार के लिए कहता रहा है।
जय शंकर ने आगे कहा कि यह सम्मेलन तब हो रहा है, जब दुनिया कई संघर्षों, तनावों और दबावों से जूझ रही है। खासतौर पर हम( ग्लोबल साउथ के देश) ज्यादा प्रभावित हैं।
समिट में 123 देशों ने लिया हिस्सा
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि ग्लोबल साउथ समिट के तृतीय सत्र का समापन किया गया। इसमें 123 देशों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा 21 राष्ट्राध्यक्ष, 118 मंत्री और 34 विदेश मंत्रियों ने इसमें सहभागिता की। इसे अलावा 10 मंत्रिस्तरीय सत्र आयोजित किए गए। जहां टिकाऊ भविष्य के लिए वैश्विक दक्षिण को सशक्त बनाने पर चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समिट में आतंकवाद और उग्रवाद के मुद्दे का जिक्र किया। कर्ज को लेकर किसी खास देश ने जानकारी नहीं दी।