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'भूकंप' और 'चमोली' ग्लेशियर के फटने का है आपस में कनेक्शन

Sun, 14 Feb 2021 06:36 PM IST
संजीव कुमार झा आशीष तिवारी, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • चमोली ग्लेशियर फटने से पहले ही मच रही थी धरती के नीचे हलचल
  • वरिष्ठ भू वैज्ञानिको का मानना कि भूकंप से ग्लेशियर और हिमालयन रीजन में पड़ रही दरारें
  • आगे भी हो सकती हैं ऐसी कई घटनाएं
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चमोली हादसा - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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चमोली में ग्लेशियर क्यों फटा इसको लेकर देश और दुनिया भर के वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। पहली नजर में यही माना जा रहा है कि बढ़ते तापमान की वजह से हुए पर्यावरण असंतुलन के कारण ही ग्लेशियर फटा। लेकिन इसका एक पहलू और भी है। दो दिन पहले पूरे उत्तरी भारत में जिस तरीके से भूकंप के झटके महसूस किए गए उससे वैज्ञानिकों को इस बात का अंदेशा और बढ़ गया है कि चमोली में हुई घटना भूकंप की वजह से हुई।

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जिस भूकंप को हम लोगों ने दो दिन पहले महसूस किया दरअसल वह पिछले कुछ दिनों से हिमालयन बेल्ट में धरती के निचले हिस्से को हिला रहा था। इस वजह से हिमालय के बहुत से रीजन में ऐसी हलचल बनी हुई थी। भू वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले दिनों में भी ऐसी घटनाएं सामने आ सकती हैं। जिससे और बड़ी घटना होने का अंदेशा है।

देश के वरिष्ठ भूवैज्ञानिक और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अपर महानिदेशक रहे डॉक्टर सोमनाथ चंदेल कहते हैं कि चमोली की घटना हिमालय में धरती के नीचे मची हलचल की वजह से हुई है, इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता। डॉक्टर चंदेल कहते हैं कि अगर सैटेलाइट इमेज का अध्ययन किया जाए तो पता चलेगा कि हिमालयन रीजन में ग्लेशियर की ऐसी घटनाएं बीते कुछ सालों में लगातार हो रहीं हैं।
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कुछ की ग्रेविटी ज्यादा होती है तो कुछ की कम। ऐसा पर्यवारण के असंतुलन से लेकर धरती के नीचे मचने वाली हलचल की वजह से ही हो रहा है। डॉक्टर चंदेल का मानना है कि जो घटनाएं मानवीय जीवन और रिहायशी इलाकों को निशाना बना लेती हैं उन पर मंथन होता है और फिर उसको दुरुस्त करने की कवायद की जाती है। जहां असर नहीं दिखता है वहां इन घटनाओं को कोई समझ नहीं पाता है। चमोली की घटना भी पहले से आ रहे भूकंप की वजह से हुई। फिर इसके साथ और भी कई पर्यावरणीय कारक जुड़ते गए।

नेपाल में भी फटा था ग्लेशियर
जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अपर महानिदेशक रहे डॉक्टर चंदेल कहते हैं  कि 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के वक्त उन्होंने इस भूकंप और उसके कारणों को बारीकी से अध्ययन किया था। उन्होंने पाया था कि जब नेपाल में भूकंप आया उससे पहले और बाद में हिमालय के कई ग्लेशियर दरक गए और फट गए। उनकी रिपोर्ट में सामने आया था कि ग्लेशियर फटने की वजह से 22 से ज्यादा लोगों की जान चली गईं थीं। इसलिए स्पष्ट है कि ऐसी घटनाओं का आपस में सीधा संबंध होता है। 

भूवैज्ञानिको का मानना है कि हिमालयन रीजन में लगातार धरती के नीचे हलचल मचती रहती है। उनका सीधा सीधा असर हिमालयन बेल्ट में प्राकृतिक संपदा पर पड़ता है। वह कहते हैं कि चाहे ग्लेशियर का फटना हो या नदियों में पानी के कम या ज्यादा होने की घटना। इसका सीधा कनेक्शन भूकंप और धरती के नीचे होने वाली हलचल से होता है।

नार्थ ईस्ट और नार्थ वेस्ट में ज्यादा हलचल
पूरे देश में भूकंप के लिहाज से कई खतरनाक जोन हैं। ये जोन सिस्मिक जोन कहलाते हैं। इसमें मैदानी इलाकों से लेकर पहाड़ी इलाके तक शामिल हैं। जिसमें उत्तर भारत से लेकर मध्य भारत के कई राज्य और प्रमुख शहर शामिल हैं।

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