वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली से बहुत से लोगों के मन में संदेह पैदा हो रहा है। संदेह इस बात का कि कहीं सरकार और सत्ताधारी दल भारत की उस पहचान के साथ छेड़छाड़ तो नहीं कर रहा है जो अब तक इसकी पहचान बना रहा है। इस वर्ग के मन में यह सवाल पैदा होने के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण तो यह है कि अपने कामकाज की प्रणाली में वह कई बार ऐसे तरीके इस्तेमाल कर रही है जो परम्परागत तरीके नहीं रहे हैं। चाहे रिजर्व बैंक के साथ टकराव की स्थिति का मामला रहा हो या सीबीआई में अधिकारियों के बीच विवाद का, चाहे नोटबंदी जैसा कदम रहा हो या चाहे फौज के राजनीतिक इस्तेमाल का, इस सरकार ने हमेशा ऐसे कदम उठाये हैं जिससे इन संस्थाओं की साख को चोट पहुंची है।