कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत पर संविधान उल्लंघन का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने सरकार का पूरा भाषण नहीं पढ़ा और केंद्र के इशारे पर काम किया। सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रही है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत पर संविधान उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है। सिद्धारमैया ने कहा कि राज्यपाल ने सरकार द्वारा तैयार पूरा भाषण नहीं पढ़ा, जो संविधान के खिलाफ है। बंगलूरू में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यपाल ने केंद्र सरकार के कठपुतली की तरह व्यवहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने संविधान के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं किया है।
सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि हम राज्यपाल के इस रवैये के खिलाफ विरोध करेंगे। सरकार इस बात की जांच करेगी कि क्या राज्यपाल के आचरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया जाए।
क्यों हुआ विवाद?
दरअसल राज्यपाल विधानसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करने पहुंचे तो लेकिन उन्होंने पूरा भाषण नहीं पढ़ा और सिर्फ दो लाइनें पढ़कर सदन से चले गए। इसके बाद विधायकों ने हंगामा कर दिया और नारेबाजी की। इससे पहले बुधवार को राज्यपाल ने विधानसभा के संयुक्त सत्र को संबोधित करने से इनकार कर दिया था। जिससे कर्नाटक में भी सरकार और राज्यपाल के बीच तनातनी की स्थिति बन गई थी, जो कि अभी कई गैर-भाजपा शासित राज्यों में दिखाई दे रही है।
राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच तनातनी का तीसरा मामला
राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच तनातनी का बीते दो दिनों में यह तीसरा मामला है। इससे पहले तमिलनाडु राज्यपाल आर एन रवि और तमिलनाडु सरकार के बीच भी संयुक्त सत्र के भाषण को लेकर विवाद हुआ। साथ ही केरल के राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच भी इसी मुद्दे पर मतभेद हुए।