किशोर न्याय अधिनियम और दत्तक ग्रहण विनियम के तहत दिया जाता है प्रक्रिया को अंजाम
भारत की गोद लेने की व्यवस्था का जिम्मा 35 दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियां (सारा), 719 विशेष दत्तक ग्रहण एजेंसियां,757 जिलाधिकारी, 714 मुख्य चिकित्सा अधिकारी और 760 जिला बाल संरक्षण इकाइयां (डीसीपीयू) संभालते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, भारत 44 केंद्रीय प्राधिकरणों, 21 भारतीय राजनयिक मिशनों और 65 मान्यता प्राप्त विदेशी गोद लेने वाली एजेंसियों के साथ काम करता है।
गोद लेने वाले 35,701 और बच्चे सिर्फ 2,435
गोद लेने की इच्छा रखने वाले लोगों की संख्या के मुकाबले गोद दिए जाने वाले बच्चों की संख्या बेहद कम हैं। अप्रैल 2025 तक केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) के केयरिंग पोर्टल पर गोद लेने के इच्छुक 35,701 दंपतियों ने पंजीकरण कराया है। इनमें 32,873 भारतीय नागरिक ओएएस बच्चों को गोद लेने के इंतजार में हैं। 300 एनआरआई, 216 ओसीआई और 319 विदेशी भी कतार में हैं।
गोद लेना असामान्य नहीं रहा
एक अधिकारी ने बताया कि अब तक सबसे बड़ी चुनौती बच्चों और उन्हें अपनाने की इच्छा रखने वालों के बीच की दूरी रही है। लेकिन 2023-24 में इसमें सुधार हुआ। कई वर्षों से संस्थानों में रह रहे 8,500 से अधिक बच्चों को गोद लेने के लिए मुहैया कराया गया। साथ ही, कारा के नेटवर्क में 245 नई एजेंसियों को जोड़ा गया। सबसे अहम बात यह है कि लोगों का नजरिया बदल रहा है। गोद लेना अब कोई असामान्य फैसला नहीं रहा, बल्कि यह एक सामान्य और स्वीकार्य विकल्प बनता जा रहा है।
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