केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री महेश शर्मा एक बार फिर विवादों के साये में हैं। हर बार की तरह अपने विवादित बोलों के कारण वह चर्चा में आ गए हैं। विवाद वजह बना है उनका वह बयान जिसमें उन्होंने भारत आने वाली विदेशी महिला सैलानियों को स्कर्ट न पहनने की सलाह दे डाली है।
सलाह ये भी कि देर रात में बाहर न घूमें। हालांकि मामला गर्माते ही उन्होंने बयान से पलटी मारने में भी देर नहीं लगाई। सफाई दी, मैंने तो ये कहा ही नहीं, बयान का मतलब भी गलत निकाला गया।
लेकिन ऐसा क्या है कि स्मृति ईरानी के बाद मोदी सरकार में सबसे ज्यादा विवाद उनके नाम से ही जुड़े हैं। नोएडा से सांसद महेश वर्मा लगातार अपने विवादों के कारण सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर रहे हैं।
लगातार विवादों में बने रहते हैं महेश शर्मा
- फोटो : अमर उजाला
ज्यादा दिन नहीं बीते जब उनके काफिले के एक सुरक्षाकर्मी ने गाजियाबाद की एक सोसायटी के गार्ड को सिर्फ इसलिए पीट डाला था कि उसने मंत्री के काफिले को हाथ देकर रोकने की जुर्रत कर डाली थी। सरेआम सोसायटी के गार्ड को थप्पड़ मारने की यह फुटेज वायरल हुई तो महेश शर्मा निशाने पर आ गए।
खास बात ये थी कि सुरक्षाकर्मी ने जब यह हरकत की उस समय महेश शर्मा अपनी गाड़ी में ही बैठे हुए थे। उन्होंने बाहर आने तक की जुरूरत नहीं समझी। मामला मीडिया की सुर्खियां बना तो केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने यह कहकर उसे ठंडा करने का प्रयास किया कि आरोपी सुरक्षाकर्मी को हटा दिया गया है।
कुछ दिन पहले ही महेश शर्मा एक और अटपटा बयान देकर विवादों में घिर गए थे जब उन्होंने लड़कियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लड़कियों का देर रात लड़कों के साथ घर से बाहर घूमना हमारी संस्कृति नहीं, ये जिनकी संस्कृति है उन पर ही अच्छा लगता है।
लड़कियों को पहले भी दे चुके हैं रात को घर से न निकलने की सलाह
- फोटो : getty images
इससे पहले औरंगजेब रोड को लेकर चल रहे विवाद में उनकी एक टिप्पणी ने भी बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। औरंगजेब को क्रूर शासक बताते हुए महेश शर्मा ने दिल्ली की औरंगजेब रोड का नाम पूर्व राष्ट्रपति एपीजे कलाम के नाम पर करने की मांग की थी।
कुछ दिन पहले ही उन्होंने गीता और रामायण को देश की आत्मा बताकर विवाद खड़ा कर दिया था। तब महेश शर्मा ने एक बयान में कहा था कि कुरआन और बाइबिल भारत की आत्मा नहीं हो सकती भारत की आत्मा तो गीता है। हालांकि तब विवाद खड़ा हुआ तो उन्होंने माफी मांगकर इससे पिंड छुड़ा लिया था।
सवाल ये है कि महेश शर्मा के बयानों पर एक के बाद एक विवाद आखिर खड़ा क्यों होता है। क्या रह रहकर उनकी जुबान फिसल जाती है या वो जानबूझकर ऐसे विवादित बयान देकर खुद को चर्चा में बनाए रखना चाहते हैं।
क्योंकि आरएसएस के साथ लंबा सफर कर राजनीति में प्रवेश करने वाले महेश शर्मा की गिनती उस अनाड़ी नेता से तो नहीं की जा सकती जो बोलने से पहले अपने शब्दों का प्रभाव न जानता हो?