दरअसल, राष्ट्रीय नाट्यकला संस्थान (एनएसडी) में अब पहले की तुलना में ज्यादा संख्या में युवा थिएटर यानी नाटक कला सीखने के लिए आ रहे हैं। अभिभावक बच्चों को थिएटर सिखाने के लिए पैसे खर्च कर रहे हैं, और पूरा जतन कर रहे हैं। इसके पीछे का कारण यह है कि यहां से निकले छात्रों ने अभिनय की दुनिया में बड़ा नाम कमाया है।
सिनेमा उद्य़ोग में काम कर रहे कई नामी कलाकार जैसे ओम पुरी, राजबब्बर, अनुपम खेर, राजपाल यादव और नवाजुद्दीन सिद्दीकी यहीं से निकले हैं। इससे सिनेमा जगत की तरफ आकर्षित होने वाले युवा थियेटर के जरिये ही अपना रास्ता तलाश रहे हैं। लेकिन इन चमकीले सितारों के बीच संघर्ष करने वाले वे लाखों थिएटरकर्मी भी मौजूद हैं जो इस कला के जरिए अपनी रोजी-रोटी चलाने में भी खुद को असमर्थ पा रहे हैं।
प्रसिद्ध रंगकर्मी राजेंदर नाथ के निर्देशन में मुंशी प्रेमचंद की कहानियों का एक मंचन सोमवार को दिल्ली में हुआ। इस मंचन के दौरान न सिर्फ पूरा हाल दर्शकों से भरा था, बल्कि नाटक के बीच कलाकारों को लगातार तालियां मिल रहीं थीं जो यह बता रहीं थी कि दर्शकों का भरपूर मनोरंजन हो रहा था। नाटक के बाद जब दर्शकों से इसके बारे में उनकी प्रतिक्रिया ली गई तो उन्होंने इसे बहुत उत्साहवर्धक बताया। कुछ दर्शकों का सुझाव था कि नाटकों के मंचन में अगर आधुनिक तकनीकी का बेहतर संयोजन हो तो इससे ज्यादा लोगों को जोड़ा जा सकता है।
एनएसडी के एके बरुआ के मुताबिक दरअसल, नाटक अब बहुत खर्चीले हो गए हैं। एक मंचन के लिए एक हाल बुकिंग की कीमत ही 50 हजार से एक लाख रुपये के बीच होती है। कलाकारों, अभिनय की प्रैक्टिस के दौरान काफी खर्च होता है। सामान्य रंगमंच के लिए आज के दौर में दर्शकों से इतना वसूलना लगभग नामुमकिन होता है। यही कारण है कि आधुनिक तकनीकी का सीमित उपयोग, वह भी नाटक की थीम के ऊपर करना ही संभव हो पाता है।