क्यों दिखता है रक्त जैसा लाल चांद
खगोलशास्त्री बताते हैं कि चंद्र ग्रहण को ‘ब्लड मून’ कहे जाने की वजह इसका रंग होता है जो इस दौरान पूरी तरह से बदल जाता है। दरअसल, चंद्रग्रहण के समय जब सूरज और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आती है तो सूरज की किरण रुक जाती है। पृथ्वी के वातावरण की वजह से रोशनी मुड़कर चांद पर पड़ती है और इस वजह से यह लाल नजर आता है। जब पूर्ण चंद्रग्रहण होता है तभी ब्लड मून होता है।
इतना लंबा ग्रहण करीब 150 साल बाद दिखाई देने जा रहा है। यह आरंभ रात 11 बजकर 54 मिनट पर होगा इसका मध्यकाल रात 1 बजकर 54 मिनट पर होगा और 28 जुलाई को सुबह 3 बजकर 49 मिनट पर ग्रहण का समाप्त होगा। इस तरह ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 55 मिनट की होगी।