भारत में हुए गंभीर अपराधों में शामिल अपराधियों को दूसरे देशों की ओर से सौंपने से इनकार किए जाने पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त शब्दों में कहा है कि विश्व को भारत की दरियादिली और उदारता को हल्के में नहीं लेना चाहिए। पीठ ने कहा है कि विश्व को तमाम देशों को भारत के कानून का भी सम्मान करना चाहिए।
चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा है कि भारत में खुले दिल से विदेशी नागरिकों का सम्मान व आदर सत्कार किया जाता है लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि दूसरे देश यहां के कानून का सम्मान न करें और बावजूद उसके वे वैसा ही सम्मान पाने की उम्मीद रखें।
पीठ ने कहा कि हमारी दरियादिली और उदाहरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भारत दूसरे देशों से अपराधियों को सौंपने के लिए कहता है, वे इनकार कर देते हैं। ऐसे में हमें भी इतनी दरियादिली क्यों दिखानी चाहिए। खास कर तब जब वे हमारे देश के कानून का सम्मान नहीं करते हैं।
शीर्ष अदालत ने ये टिप्पणी सूडान के दो नागरिक अमीर अहमद खम्स और उसके भाई की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। इन दोनों ने भारत में रिफ्यूजी का दर्जा देने की गुहार की थी। जिसके बाद भारत सरकार ने इन दोनों को बंगलूरू के कॉलेज में पढ़ने की इजाजत दे दी थी।