वृद्ध जीव प्रजनन, व्यवहार और सामाजिक संरचनाओं व पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिकाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में अहम जानकारी प्रदान करते हैं। प्रकृति की सहायता के लिए वृद्ध जीव अनोखे जैविक कार्य और महत्वपूर्ण सेवाएं प्रदान करते हैं, जिन पर मनुष्य निर्भर रहते हैं, लेकिन मानवीय गतिविधियों के कारण अब यह विनाश के कगार पर पहुंचते दिख रहे हैं।
चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय में हुआ शोध
चार्ल्स डार्विन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए नए अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। इसमें जंगल में बूढ़े और बुद्धिमान जीवों के नुकसान होने के परिणाम और वैज्ञानिक जानकारी व जैव विविधता के लिए इन जीवों की अहमियत का पता लगाया गया है। पृथ्वी के बूढ़े, बुद्धिमान और बड़े जानवरों का नुकसान शीर्षक वाला यह शोध साइंस जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
शोधकर्ताओं के मुतािबक, हाथी, व्हेल, शार्क, कोरल व कछुए जैसी लंबे समय तक जीने वाली प्रजातियों के वृद्ध लंबे समय तक ज्ञान अर्जित करते हैं। इससे उन्हें कई फायदे मिलते हैं। साथ ही उन्हें अपनी संतानों या पौत्र-पौत्रियों की बेहतर देखभाल करने में मदद मिलती है। इन प्रजातियों में दादी-नानी के कारण उनके पोते-पोतियों के जीवित रहने व प्रजनन करने की संभावना बढ़ जाती है।
बड़े जीवों का योगदान
मछलियों व अन्य ठंडे खून वाले जीवों में बड़े जीव आमतौर पर जीवनभर बढ़ते रहते हैं और इससे उन्हें अपनी संतानों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलती है। इन जीवों के सफल संरक्षण के लिए प्रबंधन रणनीतियों की आवश्यकता होती है, क्योंकि प्राकृतिक परिस्थितियों में रहने वाले पशु शायद ही कभी अपनी अधिकतम आयु तक पहुंच पाते हैं। शिशु मृत्यु दर, बीमारियों, शिकारियों, खराब मौसम, आवास विनाश, भोजन और आश्रय के लिए प्रतिस्पर्धा के कारण उनकी मृत्यु दर बहुत अधिक होती है। भूमि और समुद्र पर पुराने जानवरों की कमी निवास स्थान की कमी चरम जलवायु घटनाओं के कारण भी होती है।
जैविक अमरता नामक दुर्लभ गुण है कुछ जीवों में
कुछ जीव में जैविक अमरता नामक एक दुर्लभ गुण होता है। इसका अर्थ है कि उनकी कोशिकाएं अनंत काल तक पुनर्जीवित हो सकती हैं, जिससे जैविक उम्र बढ़ने से बचा जा सकता है। हालांकि ये जीव हमेशा के लिए जीवित नहीं रह सकते, क्योंकि वे अभी भी शिकार, बीमारी और अपने पर्यावरण में बदलाव के कारण मर जाते हैं।
उदाहरण से समझिए तर्क
जैविक अमरता वाली एक प्रजाति का उदाहरण जेलीफिश के रूप में दिया गया है। दूसरा झींगा मछली है। यह मछली अपने पूरे जीवन में बढ़ती रहती हैं और अंततः अपने खोल से बाहर निकल जाती हैं। वे अक्सर थकावट या खोल के ढहने से मर जाती हैं, लेकिन जेलीफिश और झींगा के लंबे समय तक जीवित रहने का अर्थ यह होता है की आने वाले समय में समुद्र की सेहत ठीक रहेगी।