नीति आयोग ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार अधिनियम(मनरेगा) को कृषि के अनुरुप बनाने पर राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने नीति आयोग में चर्चा की। मनरेगा को लेकर प्रधानमंत्री ने म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्ष में 17 जून को एक उच्च स्तरीय समिति गठित की थी। इस समिति में उ.प्र. के मुख्यमंत्री समेत सात राज्यों के मुख्यमंत्री हैं। नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार समेत इस समिति के सदस्य मुख्यमंत्रियों ने म.प्र. के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में विभिन्न उपायों पर विचार किया। इस बैठक में किसानों को राहत पहुंचाने, खेती किसानी के लिए किसानों की लागत कम करने में मनरेगा के प्रावधान को सही रूप देने पर चर्चा हुई।
समिति के चेयरमैन शिवराज सिंह चौहान और योगी आदित्यनाथ समेत अन्य चाहते हैं कि मनरेगा के मजदूरों को खेती-खलिहानी के कार्य के लिए भी सुलभ बनाया जाए। ताकि किसानों की किसानी में आने वाली लागत घट सके। इसके साथ-साथ मनरेगा के मजदूरों को गांवों में लगातार काम मिलने की स्थिति को सुनिश्चित किया जा सके। इसके लिए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपने-अपने सुझाव भेजे हैं। कुछ ने बैठक में उपस्थित होकर दिए हैं, कुछ मुख्यमंत्रियों ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए अपनी बात रखी है और कुछ ने लिखित में अपने सुझाव के साथ प्रतिनिध को भेजकर अवगत कराया है।
हर राज्य में कार्यशाला
बृहस्पतिवार 12 जुलाई को हुई बैठक में मुख्यमंत्रियों ने निर्णय लिया कि किसानी के लिए मनरेगा के इस्तेमाल हेतु हर राज्य में कार्यशाला आयोजित की जानी चाहिए। जनता से भी सुझाव और उनके बीच इस विचार का प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए। समिति के चेयरमैन शिवराज सिंह चौहान ने इस क्रम में 06 अगस्त को भोपाल में पहली कार्यशाला आयोजित करने पर सहमति जताई। भोपाल की कार्यशाला में अन्य राज्य में इसकी तारीखों की घोषणा होगी और 31 अगस्त को समिति की फिर बैठक होगी। इस बैठक में समिति ड्राफ्ट तैयार करके अपने सुझाव तथा सिफारिशों को नीति आयोग को सौंपेगी।