ये सिलसिला दस दिन पहले शुरू हुआ। सबसे पहले झेजियांग प्रांत में बिजली कारखानों को हर तीन दिन पर 24 घंटों के लिए उत्पादन रोकने को कहा गया। इस कारण शॉपिंग मॉल्स, सिनेमा घरों और बार आदि को अपने काम के घंटे कम करने और हीटिंग सिस्टम को बंद करने का निर्देश दिया गया। वहीं चीन में सर्दी के दौरान बिजली उपकरणों के प्रयोग पर रोक लगा दी गई।
कोरोना संकट के बाद से चीन और ऑस्ट्रेलिया के रिश्तों में भारी तनाव देखने को मिल रहा है। कोरोना की उत्पति की जांच की मांग करने के बाद से ही ऑस्ट्रेलिया चीन के आर्थिक हमलों को झेल रहा है। इस आर्थिक युद्ध के दौरान चीन ने पहले ही ऑस्ट्रेलिया से आयात होने वाले कोयला, गेंहू, चीनी, शराब और लकड़ी पर पाबंदी लगाई हुई है। इस प्रतिबंध के खिलाफ ऑस्ट्रेलियाई सरकार विश्व व्यापार संगठन में चीन के खिलाफ मोर्चा खोलने जा रही है।
ऑस्ट्रेलिया के उच्च गुणवत्ता वाले कोयले पर पाबंदी लगाने के बाद चीन उद्योगों और चीन के एनर्जी सेक्टर पर इसका बड़ा दुष्प्रभाव पड़ा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोयले पर पाबंदी के बाद चीन के हुनान और झेजियांग प्रांतों में भारी कमी हो गई है। ऑस्ट्रेलिया से कोयल के प्रतिबंध के कारण चीनी सरकार से उद्योगपति काफी नाराज हैं।
चीन ने 2060 तक खुद को कार्बन न्यूट्रल बनाने (यानी कार्बन उत्सर्जन बिल्कुल रोक देने) की महत्वाकांक्षी योजना घोषित की हुई है। कार्बन गैसों का सबसे ज्यादा उत्सर्जन कोयले से ही होता है। कोयले का उपयोग बिजली बनाने और ठंड में घरों की हीटिंग के लिए होता है। अब तक चीन के कई राज्य इन कार्यों के लिए कोयले पर ही निर्भर हैं, लेकिन अब उनसे स्वच्छ ऊर्जा अपनाने की तरफ बढ़ने को कहा गया है।