देश में गरीब और भिखारियों की कमी नहीं है, मगर उनकी ओर भक्तों का ध्यान नहीं जाता और राम रहीम, आसाराम सरीखे बलात्कारियों को हम भगवान का दर्जा दे देते हैं। एक सूक्ति है, ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता।” लेकिन आज इसका उल्टा हो रहा है। शुरू से हम यह पढ़ते आए हैं कि हमारा देश ज्ञान के क्षेत्र में विश्व गुरु रहा है, मगर मौजूदा हालातों को देखकर लगता है कि हम ज्ञान के क्षेत्र में नहीं वरन अज्ञान और अंधविश्वास के क्षेत्र में विश्व गुरु हैं।
इस देश में न वोटर जागा है और न ही भक्त! वोटर नेताओं की झूठी बातों में आकर अपना बहुमूल्य संवैधानिक अधिकार बेच देता है और भक्त आंख बंद करके अपनी अस्मत लुटा देता है? विश्व के देश जहां वैज्ञानिकों को प्रोत्साहन देकर ब्रह्मांड को समझने में लगे हैं, वहीं दूसरी ओर हम व हमारे नेता ऐसे विधर्मियों के पांव छूकर सिर-आंखों पर बैठा रहे हैं। ऐसे में मंदिर के पुजारी और लोकतंत्र के प्रहरियों को सोच-समझकर चुनने की आवश्यकता है।