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गुजरात का एक गांव जहां एक मुस्लिम महिला हैं देवी माता

Thu, 11 Aug 2016 09:00 AM IST
प्रशांत दयाल, बीबीसी
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- फोटो : bbc
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देश में मंदिर-मस्जिद के नाम पर भले ही दंगे होते रहे हों लेकिन गुजरात के गांधीनगर के पास झुलासन गांव में एक मुस्लिम महिला को देवी के रूप में पूजा जाता है। इस गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता है। यह गांव तब सुर्खियों में आया था जब भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अपने पिता के साथ गांव में डोला माता नाम की देवी के दर्शन करने आई थीं।
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गांधीनगर से करीब 20 किलोमीटर दूर बसा है यह गांव। गांव की आबादी करीब पांच हजार है। इस गांव में एक भी ऐसा परिवार नहीं है जिसका कोई ना कोई विदेश में ना हो। गांव में आठ सौ साल पुराना डोला माता का मंदिर है। डोला माता का जिक्र हिंदू धर्म में कही और नहीं आता। झुलासन से सटे हुए कलोल के स्थानीय भाजपा नेता मुकेश पटेल बीबीसी को बताया, "डोला माता एक मुस्लिम महिला थीं। ऐसा हमारे पूर्वजों ने हमें बताया था।"

डोला माता की कहानी सुनाते हुए वो कहते हैं, "जब गांवों में लुटेरे आते थे और गांव को लूट कर चले जाते थे, तो पड़ोस के गांव से गुजरने वाली एक मुस्लिम महिला ने देखा कि झुलासन गांव में लूट मची हुई है। उन्होंने ठहर कर लुटेरों को ललकारा और लड़ते-लड़ते मर गईं। आज जहां मंदिर है वहीं वो मरी थीं। इसके कई साल के बाद उनके नाम पर मंदिर बना। हमारी उनमें श्रद्धा है। वो हमारी रक्षा भी करती हैं और हमारी तकलीफें भी दूर करती हैं।"
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डोला माता के मुस्लिम होने के बावजूद गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं

अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स - फोटो : bbc
झुलासन गांव के जो लोग विदेशों में बसे हुए हैं, उनमें अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स के पिता दीपक पंड्या भी हैं। दीपक पंड्या 22 साल की उम्र तक झुलासन में ही रहते थे। उसके बाद वो अमरीका चले गए थे। सुनीता विलियम्स जब अंतरिक्ष में जाने वाली थीं तो वो अपने पिता के साथ डोला माता का आशीर्वाद लेने झुलासन आई थीं।

मंदिर के पुजारी दिनेश पंड्या ने बीबीसी को बताया कि अपने घर वापस आने वाला गांव का कोई भी एनआरआई या विदेश में शादी कर के लौटने वाला झुलासन का कोई भी बाशिंदा एयरपोर्ट से सीधे डोला माता के दर्शन करने के बाद ही घर जाता है। उन्होंने बताया कि सुनीता गांव की बेटी हैं। वो अंतरिक्ष से लौटने के बाद भी डोला माता के दोबारा दर्शन करने आई थीं।

गांव के निवासी विष्णु पटेल ने बताया कि डोला माता के मुस्लिम होने के बावजूद गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं है। हालांकि रविवार और गुरुवार को डोला माता के मन्नत का दिन माना जाता है। इस दिन आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में मुस्लिम भी आते हैं।

गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार पूर्व पटेल ने बताया कि 2002 के दंगों में उत्तर गुजरात के कई गांवों में दंगे हुए थे। मंदिरों और मस्जिदों को तोड़ा गया था। लेकिन आश्चर्य की बात है कि डोला माता के मंदिर को किसी ने नुकसान पहुंचाने के बारे में सोचा भी नहीं।
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