भारत की तेल कंपनियां सरकार की रणनीति के तहत सऊदी अरब से मई में एक करोड़ बैरल से कुछ अधिक ही कच्चा तेल खरीदेंगी, जबकि औसत रूप से करीब डेढ़ करोड़ टन तेल हर माह यहां से लिया जाता है। पेट्रोलियम सचिव तरुण कपूर ने कहा कि तेल कंपनियों को सामूहिक रूप से बेहतर सौदेबाजी करने को कहा गया है। हालांकि सऊदी अरब से आयात कम करने के सवाल पर वे मौन साध गए।
भारत के आग्रह को किया नजरअंदाज
भारत अपनी कच्चे तेल की 85 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरा करता है। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति तथा कीमतों में उतार-चढ़ाव का भारत पर भी असर पड़ता है। फरवरी में कच्चे तेल के दाम फिर बढ़ने शुरू हुए थे। उस समय भारत ने सऊदी अरब से उत्पादन पर अंकुश कम करने का आग्रह किया था, लेकिन उसने भारत के आग्रह को नजरअंदाज कर दिया था। उसी के बाद भारत अपनी आपूर्ति के विविधीकरण कर प्रयास कर रहा है।
बता दें कि ओपेक देशों द्वारा उत्पादन में कटौती कर कच्चे तेल के दाम बढ़ाने की रणनीति से भारत जैसे देशों को भारी नुकसान हो रहा है। कोरोना महामारी के बाद आर्थिक संकट से उबरने में जुटे देश को महंगे ईंधन की मार झेलनी पड़ रही है। वहीं दाम बढ़ने से देश के लोगों में भी आक्रोश है। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि कच्चे तेल के दाम बढ़ने से देश का तेल आयात बिल भी बहुत बढ़ गया है। देश में तेल के दाम सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं।
2040 तक दोगुनी हो जाएगी खपत
अंतरराष्ट्रीय उर्जा एजेंसी का अनुमान है कि भारत में तेल की खपत 2019 के मुकाबले 2040 तक दोगुनी हो जाएगी और तेल आयात पर खर्च करीब तीन गुना होकर 250 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगा।