फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ताज की खूबसूरती के लिए जहर बन रहा है जलता कचरा

Sun, 16 Oct 2016 11:45 PM IST
एजेंसी/वाशिंगटन
विज्ञापन
- फोटो : Getty Images
विज्ञापन
ऐतिहासिक ताज महल के आसपास निगम के ठोस कचरे को जलाने की वजह से इस वैश्विक धरोहर का रंग फीका पड़ रहा है। यह दावा किया है भारत और अमेरिका की एक संयुक्त रिसर्च टीम ने। रिसर्च में उपले और ठोस कचरे को जलाने से ताज महल और आसपास रहने वाले लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया गया है। रिसर्च टीम में मिनेसोटा विश्वविद्यालय के अजय नागपुरे और जार्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के राज लाल भी शामिल थे। 
विज्ञापन


रिसर्च टीम ने इस बात के वैज्ञानिक सुबूत दिए हैं कि निगम के ठोस कचरे को ताज के आसपास जलाने से पर्यावरण खतरनाक स्तर तक प्रदूषित हो रहा है। रिसर्च टीम ने कहा है कि खुले में ठोस कचरे को जलाने से ताज की हर वर्ग मीटर सतह पर 150 मिलीग्राम पीएम-2.5 (फाइन पार्टिकूलेट मैटर) हर साल जमा हो रहा है, जबकि उपले जलाने से 12 मिलीग्राम पीएम-2.5 (फाइन पार्टिकूलेट मैटर) जमता है। रिसर्च टीम ने यह भी कहा है कि उपले और ठोस कचरे को जलाने का लोगों के स्वास्थ्य पर भी काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। 

जार्जिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के अर्मिस्टेड रसेल ने कहा कि ठोस कचरे को जलाने पर रोक लगाने से भी समस्या का समाधान नहीं होने वाला, क्योंकि यहां रहने वालों के पास ऐसा करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। रिसर्च टीम में शामिल आईआईटी-कानपुर के सच्चिदा त्रिपाठी ने कहा है कि ठोस कचरे को जलाने से वायु प्रदूषित हो रहा है, जिसका असर लोगों के स्वास्थ्य के साथ ही ताज महल के रंग पर भी पड़ रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें