सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल मैरिज एक्ट के प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका में एक्ट के उस प्रावधान को चुनौती दी गई है, जिसमें शादी करने वाले पुरुष व महिला को 30 दिन पहले निजी जानकारी सार्वजनिक करनी होती है। याचिका में कहा गया है कि यह निजता के अधिकार का उल्लंघन है।
चीफ जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम की पीठ ने बुधवार को कोच्चि की लॉ छात्रा नंदिनी परवीन की याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ता ने निजी जानकारी सार्वजनिक करने के प्रावधान को गैरकानूनी और असांविधानिक बताया है।
याचिकाकर्ता ने एक्ट की धारा-5, 6, 7, 8, 9 आदि को चुनौती दी है। इन प्रावधानों के तहत शादी करने की इच्छा रखने पुरुष व महिला के लिए विवाह दफ्तर के क्षेत्र में 30 दिनों से पहले से रहना अनिवार्य है। उन्हें विवाह करने की इच्छा की जानकारी विवाह अधिकारी को देनी होती है।
अधिकारी को विवाह नोटिस को प्रकाशित करना होता है, इसमें पुरुष व महिला के बारे मांगी जानकारी होती है। नोटिस का मकसद होता है कि कोई भी पक्ष शादी को लेकर आपत्ति दर्ज करा सकता है। याचिका में कहा गया है कि जानकारी को सार्वजनिक करना निजता के अधिकार का उल्लंघन है। याचिका में पुट्टास्वामी सहित कई अन्य मामलों का हवाला दिया गया है।
बुधवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील से पूछा, अगर लड़का-लड़की भागकर शादी करना चाहते हैं तो उन मामलों में क्या होगा?
दोनों के घरवाले अपने बच्चों के बारे में कैसे जानकारी रख पाएंगे। इस पर वकील ने कहा कि उन्हें अधिकारी द्वारा लड़का और लड़की से जानकारी लेने में आपत्ति नहीं है। आपत्ति जानकारी को सार्वजनिक करने को लेकर है।