फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सचिन को विज्ञापन करने से नहीं रोक सकते, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

Tue, 19 Jul 2016 08:57 AM IST
राजीव सिन्हा/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
विज्ञापन
भारत रत्न प्राप्त क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर पर विज्ञापन करने की पाबंदी लगाने संबंधी याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई नियम नहीं है जो राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता को व्यावसायिक विज्ञापन करने पर रोक लगाता हो।
विज्ञापन


न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को अपने फैसले में कहा है ऐसा कोई वैधानिक प्रावधान न हो या कोई सरकारी नियम न हो, जो भारत रत्न या राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त व्यक्यिं को विज्ञापन करने से रोकता हो।

ऐसे में अदालत द्वारा इस तरह की पाबंदी लगना पूरी तरह से गलत होगा। पीठ ने कहा कि इस स्थिति में अगर नागरिक यह शिकायत करता है कि राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अपने सम्मान का दुरूपयोग कर रहा है तो उसके पास सरकार के पास जाने केअलावा और कोई रास्ता नहीं है। 
विज्ञापन


शीर्ष अदालत वीकेनासवा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया था कि क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर भारत-रत्न का व्यावसायिक इस्तेमाल कर रहे हैं। याचिका में आरोप लगाया गया था कि सचिन देश केसबसे बड़े सम्मान भारत-रत्न का व्यावसायिक इस्तेमाल कर पैसे कमा रहे हैं।

ऐसा करना सबसे बड़े सम्मान के सिद्धांत, गौरव और विरासत के खिलाफ है। याचिका में यह भी कहा गया था कि सचिन को नैतिक आधार पर इस सम्मान को वापस कर देना चाहिए या सरकार को सचिन से यह सम्मान वापस ले लेना चाहिए। 
विज्ञापन

सचिन को गुनहगार नहीं ठहराया जा सकता

भोपाल निवासी नासवा ने याचिका में कहा था कि कुछ लोगों ने अपनी पुस्तकों में सचिन को भारत-रत्न से संबोधित किया गया है। लेकिन पीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि अगर कोई लेखक अपनी किताब को प्रमोट करने के लिए सचिन को भारत रत्न विजेता से संबोधित करता है तो इसमें सचिन को इसके लिए कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि क्या सचिन ने कोई किताब लिखी है और उसमें अपने नाम के आगे या पीछे भारत-रत्न का जिक्र किया होता तो बात दूसरी होती। लेकिन अगर कोई तीसरा व्यक्ति अपनी किताब में इसका जिक्र करता है तो इसके लिए सचिन को गुनहगार कतई नहीं ठहराया जा सकता।

याचिकाकर्ता ने पहले जबलपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जहां सरकार की ओर से बताया गया था कि भारत-रत्न सम्मान से नवाजे गए व्यक्तियों को विज्ञापन करने पर पाबंदी संबंधी कोई कानूनी प्रावधान नहीं है और न ही सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में कोई निर्देश दिया है। जिसकेबाद हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को केंद्र सरकार से संपर्क करने के लिए कहा था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें