बहुचर्चित वस्तु व सेवाकर (जीएसटी) विधेयक सोमवार को महाराष्ट्र विधान मंडल के दोनो सदनों में सर्वसम्मति से पारित हो गया। इसके साथ महाराष्ट्र जीएसटी बिल पारित करने वाला देश का 9वां राज्य बन गया है। विधानसभा और विधान परिषद में जीएसटी बिल को मंजूरी मिलने के बाद आगामी अप्रैल महीने से राज्य में भी जीएसटी लागू होने का रास्ता साफ हो गया है।
सोमवार को महाराष्ट्र विधानमंडल का एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया था। राज्य के वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने जीएसटी विधेयक सदन में पेश किया। उसके बाद इसके लागू होने पर राज्य में होने वाले नफा-नुकसान को लेकर आशंकाएं व्यक्त की गई।
विधानसभा में जीएसटी पर चर्चा का सबसे अहम मुद्दा मुंबई का था। मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) को प्रतिवर्ष करीब 7 हजार करोड़ रुपये आक्ट्रॉय (चुंगी) से मिलते हैं लेकिन जीएसटी लागू होने के बाद आक्ट्रॉय हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। मुंबई के पूर्व मेयर व शिवसेना विधायक सुनील प्रभु ने मांग की कि मुंबई के हक की निधि सीधे बीएसमी की तिजोरी में जमा कराने का प्रबंध होना चाहिए जिससे उसे केंद्र या राज्य सरकार से अपनी हिस्सेदारी मांगने की जरूरत न पड़े।
इस पर मुनगंटीवार ने कहा कि मुंबई के लिए अलग से कानूनी प्रावधान किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि लोगों की यह आशंका निराधार है कि जीएसटी आने से मुंबई का क्या होगा। मुनगंटीवार ने महंगाई बढ़ने और जीएसटी के बाद दो पावर सेंटर बन जाने की आशंका को भी खारिज किया।