शनमुग सुब्रमण्यन ने एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी (एएसयू) के कैमरे, ल्यूनर रिकनाइसांस ऑर्बिटल कैमरा (एलआरओसी) से तस्वीरें डाउनलोड की। उनके अलावा करीब 26 लोगों ने विक्रम के बारे में जानने के लिए इसकी तस्वीरों को डाउनलोड किया।
सुब्रमण्यन ने तीन अक्तूबर को नासा, एलआरओ और इसरो को ट्वीट करके पूछा कि क्या यह विक्रम लैंडर है। एक बार फिर 17 नवंबर को दोबारा संपर्क किया और उन्हें विक्रम लैंडर क्रैश साइट के बारे में बताया। एएसयू ने उनके दावे को स्वीकार कर लिया और बाद में नासा ने भी इसकी पुष्टि कर दी।
एलआरओ कैमरा के डिप्टी प्रोजेक्ट साइंटिस्ट एलआरओएम जॉन केलर ने एक पत्र लिख कर सुब्रमण्यन को इसके लिए बधाई दी है। एएसयू ने कहा कि जब 17 सितंबर को तस्वीरें ली गईं, तो दुर्घटनास्थल बहुत धुंधला दिख रहा था। लेकिन 14-15 अक्तूबर को और 11 नवंबर को ली गई तस्वीरें बेहतर थीं।
जब सुब्रमण्यन ने उन्हें सूचना दी तो एलआरओसी टीम ने फिर से जांच की और दुर्घटनास्थल एवं मलबे का स्थान देख लिया। एएसयू ने कहा सुब्रमण्यन ने सबसे पहले मलबा मुख्य दुर्घटनास्थल से 750 मीटर उत्तर-पश्चिम में देखा।
द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने चंद्रयान-2 का मलबा खोज निकलाने वाले इंजीनियर शनमुग सुब्रमण्यन की प्रशंसा की है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि वह उसकी सफलता से बेहद खुश हैं और जब उन्हें पता चला कि नासा ने उसकी खोज की पुष्टि की है तो उनकी प्रसन्नता और बढ़ गई। वह उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।