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Namami Gange: गंगा की पावनता और निर्मलता रहे बरकरार, बंगाल के बृज उपाध्याय ने उठाया नदी को साफ करने का बीड़ा

Mon, 04 Nov 2024 04:11 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

साल 2009 से गंगा नदी को स्वच्छ करने में जुटे बृज उपाध्याय लोगों को गंगा नदी की अहमियत और इसकी सफाई के बारे में जागरूक करते हैं। 
 
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गंगा समग्र अभियान से जुड़े बृज उपाध्याय। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश की सबसे प्रमुख नदी गंगा को साफ करने के लिए केंद्र सरकार नमामि गंगे योजना के तहत कई काम कर रही है। गंगा नदी की सफाई, नालों को टैप करना और सीवेज प्लांट के निर्माण सरीखे तमाम कार्य किए जा रहे हैं। इन सबके बीच बंगाल में गंगा को साफ करने का बीड़ा बृज उपाध्याय ने उठाया है। साल 2009 से गंगा नदी को स्वच्छ करने में जुटे बृज उपाध्याय लोगों को नदी की अहमियत और इसकी सफाई के बारे में जागरूक करते हैं। 
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गंगा समग्र अभियान के दक्षिण बंगाल प्रांत के संयोजक बृज उपाध्याय बताते हैं कि वह 2009 से गंगा नदी की सफाई का काम कर रहे हैं। समाज और स्कूलों के एक लाख से अधिक बच्चों को जोड़कर उन्होंने गंगा स्वच्छता अभियान चलाया। इसके अलावा बृज उपाध्याय ने बंगाल में गंगा आरती, देव दीपावली, गंगा दशहरा जैसे आयोजन शुरू किए। अब उन्होंने बंगाल में गंगा उत्सव शुरू करने की तैयारी की है। 

बृज उपाध्याय बताते हैं कि गंगा महोत्सव की पहल सरकार ने की है। इसे बंगाल में भी जमीन पर उतारेंगे। इसके अलावा उन्होंने स्कूलों में जाकर बच्चों को गंगा स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। इसके अलावा वह बस्तियों और फ्लैट में जाकर लोगों को जल की निकासी जमीन के अंदर करने के बारे में भी बता रहे हैं। उन्होंने बताया कि गंगा को स्वच्छ करने के लिए वह लगातार काम करते रहेंगे। 
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यह है गंगा उत्सव कार्यक्रम
गंगा उत्सव 2024 का आयोजन राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) द्वारा 4 नवंबर को हरिद्वार के चंडी घाट पर किया जा रहा है। एनएमसीजी हर वर्ष इस कार्यक्रम का आयोजन गंगा नदी को 'राष्ट्रीय नदी' घोषित किए जाने की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में करता है। इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी के संरक्षण को बढ़ावा देना, इसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्ता को उजागर करना और स्वच्छता के प्रति जन जागरूकता बढ़ाना है। यह कार्यक्रम का आठवां संस्करण होगा और पहली बार यह नदी के किनारे मनाया जाएगा। यह आयोजन गंगा बेसिन वाले राज्यों के 139 जिलों में जिला गंगा समितियों द्वारा भी मनाया जाएगा। इसके अलावा, प्रत्येक राज्य में एक मुख्य कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
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