कश्मीर घाटी की लगातार बिगड़ती स्थिति पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चुप्पी तोड़ने की अपील करते हुए राज्यसभा में सोमवार को विपक्षी दलों ने संकट से उबारने के लिए यहां राजनीतिक प्रक्रिया तेज करने की मांग की।
घाटी में पिछले कुछ दिनों से जारी हिंसक घटनाओं के बाद वहां 31 दिनों से कर्फ्यू लगा है। विपक्षी दलों ने कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने, अफ्प्सा वापस लेने तथा रिहाइशी इलाकों से सेना की तैनाती वापस लेने की भी मांग की।
इस मसले के समाधान के लिए फौरन सर्वदलीय बैठक बुलाने की भी मांग की गई। राज्यसभा के उपसभापति पी जे कुरियन ने हालात की गंभीरता भांपते हुए सरकार से मंगलवार तक सदन में कश्मीर पर चर्चा कराने का निर्देश दिया है।
सदन में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने शून्यकाल शुरू होते ही कश्मीर के हालात का मुद्दा उठाया। आजाद ने कहा, ‘हिंदुस्तान का ताज जल रहा है, पर उसकी गर्मी दिल्ली तक नहीं पहुंचती।’ आजाद ने घाटी में मृतकों, घायलों और हिंसक घटनाओं का आंकड़ा पेश करते हुए कहा कि कश्मीर के लोग जानना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं।
देश का कोई ऐसा हिस्सा नहीं है जहां इतने दिनों तक कर्फ्यू लगा हो। उन्होंने कहा, ‘इससे वहां की शासन-व्यवस्था बिगड़ गई है, शिक्षण संस्थान बंद हैं और प्रधानमंत्री मूकदर्शक हालात को बिगड़ते देख रहे हैं।
पिलेट गनहम चाहते हैं कि सरकार जगे। वहां के हालात को नजरअंदाज न करें और इससे उबरने के लिए राजनीतिक प्रक्रिया तेज करे।’ विपक्ष के गंभीर तेवर को देखते हुए नरेंद्र मोदी ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत दोभाल के साथ आगे की नीति पर बैठक की।