मानसून के समय से पहले दस्तक देने और कई इलाकों में झमाझम बारिश के बाद भी दक्षिण पश्चिम मानसून कहीं सूखे तो कहीं अति वर्षा के संकेत दे रहा है। साथ ही अलनीनो की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस मानसून में 20 जून तक बारिश पूरे देश में सामान्य से आठ फीसदी नीचे दर्ज की गई है। पिछले साल 22 जून तक 128 लाख हेक्टेयर खेतों में बुवाई की गई थी। इस बार अब तक 115.90 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो पाई है।
कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक किसानों ने 10.67 लाख हेक्टेयर में चावल, 5.91 लाख हेक्टेयर में दालें, 16.69 लाख हेक्टेयर में मोटे अनाज, 50 लाख हेक्टेयर में गन्ना और 20.68 लाख हेक्टेयर में कपास बोया है। मौसम विभाग के मुताबिक गुजरात, ओडिशा, बिहार, झारखंड, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में 1 जून और 20 जून के बीच औसत से कम वर्षा या कोई वर्षा दर्ज नहीं की गई है।
वहीं उत्तर-पूर्वी भारत में 213 मिमी सामान्य वर्षा के मुकाबले केवल 158 मिमी वर्षा हुई है। उत्तर पश्चिम भारत में सामान्य से 12 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। मध्य भारत में भी सामान्य से 9 प्रतिशत कम बारिश हुई है। केवल दक्षिण प्रायद्वीप में अधिक बारिश हुई है। आईएमडी अधिकारियों के अनुसार मानसून ने 25 जून से रफ्तार पकड़ी है। राष्ट्रीय राजधानी में 29 जून और 1 जुलाई के बीच मानसून दस्तक देगा।
पहले भी प्रभावित कर चुका है अलनीनो
आईएमडी के अधिकारियों के मुताबिक, भारत में अलनीनो की आशंका है। यह सूखे का कारण बनने या बढ़ाने के लिए जाना जाता है और मौसमी मानसून को भी प्रभावित करता है। 1997, 2002, 2004, 2009 और 2014 में प्रशांत क्षेत्र में मजबूत अलनीनो की वजह से भारत में बड़े पैमाने पर सूखा पड़ा था।