सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में बुधवार को कहा कि परीक्षार्थी को अपनी उत्तर पुस्तिका देखने का अधिकार है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग (यूपीपीएससी) को सिविल जज (जूनियर डिविजन) परीक्षा, 2016 के एक परीक्षार्थी को उत्तर पुस्तिका दिखाने का आदेश दिया है। इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परीक्षार्थी को उत्तर पुस्तिका दिखाने का आदेश देने से इनकार कर दिया था।
जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि हमारा मानना है, परीक्षार्थी को अपनी उत्तर पुस्तिका देखने की इजाजत देने से सरकार के कामकाज पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। पीठ ने यूपीपीएससी को एक तारीख तय कर अभ्यर्थी मृदुल मिश्रा को उसकी उत्तर पुस्तिका दिखाने का निर्देश दिया। यूपीपीएससी को चार हफ्ते के भीतर इस काम को करने को कहा गया है।
याचिकाकर्ता मृदुल मिश्रा के वकील ने पीठ से कहा कि परीक्षार्थी को उत्तर पुस्तिका देखने का अधिकार है और उसके हक को दरकिनार नहीं किया जा सकता। वर्ष 2016 में आयोजित परीक्षा में मृदुल को 1100 में 535 अंक मिले थे। जबकि अंतिम चयन 538 अंक हासिल करने वाले परीक्षार्थी का हुआ था।
मृदुल ने आयोग के समक्ष आवेदन दाखिल कर उत्तर पुस्तिका दिखाने की अपील की थी लेकिन आयोग ने इसकी इजाजत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली थी।