बीते गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद भारत के राष्ट्रपति चुन लिए गए। उम्मीद यही है कि अगले महीने एम वेंकैया नायडू उपराष्ट्रपति भी बन जाएंगे। ऐसा होने पर ये पहला मौका होगा जब देश के चारों शीर्ष संवैधानिक पदों पर भारतीय जनता पार्टी के लोग होंगे। 2014 के लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद प्रधानमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी और लोकसभा स्पीकर के रूप में सुमित्रा महाजन इस सूची में शामिल है।
हालांकि उदारवादी लोग कट्टर हिंदुत्व वाली पार्टी के मज़बूत उभार से सशंकित हैं। उन्हें डर है कि इससे देश दक्षिणपंथी सोच के रास्ते पर बढ़ सकता है जो देश के लिए ख़तरनाक ट्रेंड है। लेकिन भारतीय राजनीति में इस बात के स्पष्ट रुझान मिल रहे हैं कि कांग्रेस पार्टी का असर कम हो रहा है। कांग्रेस अब अखिल भारतीय पार्टी नहीं रही है और दूसरी ओर उसकी जगह भरने के लिए भारतीय जनता पार्टी तेजी से बढ़ रही है।
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1984 में हुए आम चुनावो मे भारतीय जनता पार्टी को महज दो सीटें मिली थी। लेकिन चार दशक से भी कम समय में पार्टी ने काफ़ी दूरी तय की है। 1980 में भारतीय जनता पार्टी का गठन हुआ था। 1984 के लोकसभा चुनाव मे दो सीटो से शुरू करके 1989 में पार्टी 85 सीटों तक पहुंचने में कामयाब रही।
1991 के आम चुनाव में पार्टी ने 120 सीटे जीती। ये आंकड़ा 1998 के चुनाव में बढ़कर 198 तक पहुंच गया। इस दौरान 1996 में पार्टी की केंद्र में सरकार भी बनी। लेकिन बहुमत के अभाव में वो सरकार महज 13 दिनों तक चल पाई थी।
पार्टी के पहले चरण की कामयाबी तब देखने को मिली जब लाल कृष्ण आडवाणी ने 1989 में राम जन्मभूमि मंदिर आंदोलन की सफल शुरुआत की थी। पार्टी की कामयाबी का दूसरा चरण तब देखने को मिला जब अटल बिहारी वाजपेयी ने 1998 से 2004 के बीच प्रधानमंत्री रहे। वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार का नेतृत्व कर रहे थे।
तीसरे चरण की कामयाबी तब शुरू हुई जब 2002 में गोधरा कांड के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी हिंदुत्व के नायक बनकर उभरे। पार्टी की कामयाबी का चौथा चरण तब शुरू हुआ जब उनके नेतृत्व में 2014 मे पार्टी अपने दम पर बहुमत जुटाने मे कामयाब रही।
भारतीय जनता पार्टी में एक ख़ासियत है, यह एक स्वतंत्र राजनीतिक दल भर नहीं है बल्कि यह अपने मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) का राजनीतिक मोर्चा है। वैसे आरएसएस लगातार दावा करती रही है वो केवल सांस्कृतिक संगठन है और अराजनीतिक भी है।