राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को कहा है कि हम सभी स्कूलों और कॉलेजों में बढ़ते नशे के सेवन को लेकर चिंतित हैं। बच्चे और युवा हमारे सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति हैं। जो समय और ऊर्जा अपने भविष्य के नींव को मजबूत करने में लगाना चाहिए, उस समय केवल एक लत के कारण नष्ट कर रहे हैं। हमारे शिक्षण संस्थान, मंदिरों के समान होते हैं। सभी शिक्षण संस्थानों में काउंसिलिंग, विचार-विमर्श और अन्य गतिविधियों से पता लगाना चाहिए कि विद्यार्थी कहीं किसी गलत दिशा में तो नहीं जा रहे हैं। अगर कहीं ऐसा दिखता है तो तुरंत उस पर कार्य करना चाहिए। वे कोलकाता के राजभवन में ब्रह्माकुमारीज द्वारा आयोजित 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत 'माई बंगाल, एडिक्शन फ्री बंगाल' अभियान के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं।
राष्ट्रपति ने कहा, भारत को नशा मुक्त बनाने के कार्यक्रम में हिस्सा लेकर मुझे संतोष का अनुभव हो रहा है। मैं नशामुक्त भारत के अंतर्गत माई बंगाल, एडिक्शन फ्री बंगाल विशेष परियोजना शुरू करने के लिए प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय को बधाई देती हूं। मैं इस कार्यक्रम को प्रोत्साहन देने के लिए पश्चिम बंगाल के राज्यपाल डॉ. सीवी आनद बोस की प्रशंसा करती हूं। मैंने ब्रह्मकुमारी संस्था के आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यों को करीब से देखा है। यह संस्था आज एक वैश्विक संगठन का रूप ले चुकी है, जो विश्व के करीब 140 देशों में सामाजिक जनसमस्या के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक शसक्तिकरण के लिए कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा, आज जिस समस्या की समाधान के लिए अभियान शुरू किया गया है, वह अत्यंत गंभीर है। नशीले पदार्थों के सेवन की समस्या समाज के हर वर्ग में अपनी जड़ें तक पहुंच चुकी है। नशीले पदार्थों का सेवन आज के समय में समाज और देश के लिए चिंता का विषय है। इसके अंतरराष्ट्रीय आयाम भी है। हमारे युवा इन व्यसनों के कारण जीवन में सही दिशा का चुनाव नहीं कर पा रहे हैं। यह अत्यंत चिंताजनक है और इस विषय में सभी मोर्चों पर काम करने की जरूरत है। यह संतोष की बात है कि ब्रह्म कुमारी जैसी संस्थाएं ऐसी विषय पर गंभीरता से विचार-विमर्श करती है। इसके समाधान के लिए बड़े पैमाने पर कार्य भी कर रही है।
राष्ट्रपति ने कहा, यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में लगभग तीन करोड़ लोग ड्रग्स के कारण होने वाले डिस-ऑर्डर के शिकार हैं। हमारे युवाओं में जिस तेजी से नशे का सेवन बड़ रहा है, इस पर चिंता होना स्वाभाविक है। लेकिन यह समय केवल चिंता का नहीं है बल्कि चिंतन का और समाधान की ओर तेज गति से बढ़ने का समय है। आध्यात्मिक चेतना, चिकित्सा, सामाजिक एक जुटता और राजनीतिक इच्छाशक्ति के द्वारा सुधार लाया जा सकता है। ड्रग्स डिमांड में कमी लाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें नेशनल एक्शन प्लान के द्वारा ड्रग्स डिमांड रिडक्शन के माध्मम से ड्रग्स एडिक्शन की शिक्षा, जागरूकता, उपचार और रिहेब सेंटर के क्षमता निर्माण पर काम कर रही है। इसके अंतर्गत देश के अलग-अलग हिस्सों में नशामुक्त भारत अभियान चलाया जा रहा है।
सामाजिक बदलाव के लिए लोगों की मानसिकता में परिवर्तन लाना आवश्यक है। इसके लिए आध्यात्मिक अत्यंत प्रभावशाली माध्यम है। इस दिशा में ब्रह्मकुमारी द्वारा चलाए जा रहे नशामुक्त भारत अभियान से व्यसनों से प्रभावित लोगों को जागरूक करने में सहयोग होगा। और उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण होगा।
उन्होंने कहा, व्यसन स्वास्थ्य के लिए तो हानिकारक है ही साथ ही इससे कई अन्य तरह की बीमारी उत्पन्न होती है। आध्यात्मिक रूप से इनसान कमजोर हो जाता है। मानव चरित्र पर भी इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। इसका परिवार के आर्थिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ता है। मैं सभी युवाओं और उनके मित्रों से भी कहना चाहूंगी, अगर आपका कोई दोस्त नशे को अपना रहा है तो उसके इस आदत के बारे में उसके परिवार वालों को बताएं। उसके इस आदत को छुड़ाकर ही नहीं बल्कि सामने लाकर आपने अपने सच्चे मित्र होने का फर्ज निभा सकते हैं। आप सब जानते हैं, नशामुक्त कार्यक्रमों का आयोजन स्कूलों और कॉलेजों में भी चलाया जाता है। हमें उस दिशा में जाना है, जो हमेशा रहता है। जहां सच्चा सुख मिलता है, हमें वहां जाना है। जो सुख और जो नशा हमेशा रहता है, हमें उस दिशा में जाना है यानि वह है आध्यात्मिक रास्ता। यह आध्यात्मिक रास्ता सबसे अच्छा रास्ता है। जो लोग नशे का सेवन करते हैं, उनसे मेरा अनुरोध है कि नशे की लत से अपना जीवन बर्वाद करने मत दीजिए।
राष्ट्रपति ने कहा, अगर आप किसी तरह के तनाव में हैं, तो आप अपने परिवार, अपने दोस्तों या किसी व्यक्ति या फिर अपने आसपास किसी संस्था से बात करें। कोई समस्या ऐसी नहीं होती, जिसका आप अपने इच्छा शक्ति से सामना नहीं कर सकते। नशे की लत को बिल्कुल संभव है। आज से ही नशा छोड़ने का प्रयास शुरू कर देना चाहिए। आपको सफलता जरूर मिलेगी। आपके नशे का फायदा कोई असामाजिक तत्व उठा रहे हैं। ड्रग्स खरीदने के लिए दिए गए पैसे अपराधिक कार्यों में भी होते हैं। उन्होंने कहा, मुझे विश्वास है कि जो नशे के आदि हैं, वे नशा छोड़कर समाज और देश हित में इस बुरे लत से बाहर निकलेंगे।
राष्ट्रपति ने कहा, हम सभी स्कूलों और कॉलेजों में बढ़ते नशे के सेवन को लेकर चिंतित हैं। बच्चे और युवा हमारे सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति हैं। जो समय और ऊर्जा अपने भविष्य के नींव को मजबूत करने में लगाना चाहिए, उस समय केवल एक लत के कारण नष्ट कर रहे हैं। हमारे शिक्षण संस्थान, मंदिरों के समान होते हैं। सभी शिक्षण संस्थानों में काउंसिलिंग, विचार-विमर्श और अन्य गतिविधियों से पता लगाना चाहिए कि विद्यार्थी कहीं किसी गलत दिशा में तो नहीं जा रहे हैं। अगर कहीं ऐसा दिखता है तो तुरंत उस पर कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा, आध्यात्मिक ही सोई हुई चेतना को जगाता है। मनुष्य को सकारात्मक जीवन जीने की कला सिखाता है। अध्यात्म के द्वारा मनुष्यों को उसके आंतरिक शक्तियों का साक्षात्कार करता है। इसलिए इसे जिंदगी में अपनाना चाहिए। सब मिलकर भारत को एक स्वास्थ्य और सशक्त भारत बनाने की दिशा में काम करें। इस मौके पर राज भवन में राज्यपाल सीवी आनंद बोस, पश्चिम बंगाल की मंत्री श्रीमती शशि पांजा, ब्रह्म कुमारी की बीके कानन, ब्रह्मकुमारी की मोटिवेशनल स्पीकर सुश्री वीके शिवानी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।