केंद्रीय अर्धसैनिक बल के महानिदेशकों की शक्तियों में इजाफा
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केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'असम राइफल, बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, सीआईएसएफ, एनएसजी और एसएसबी' के शीर्ष अफसर यानी महानिदेशकों (डीजी) की इनाम देने की शक्तियों में इजाफा किया गया है। अब सभी बलों के डीजी, पहले के मुकाबले ज्यादा इनामी राशि मंजूर कर सकेंगे। अभी तक डीजी के पास प्रत्येक केस में 10 हजार रुपये तक का इनाम स्वीकृत करने की पावर रही है। अब इसे बढ़ाकर 12 हजार रुपये प्रति केस कर दिया गया है। पहले सभी डीजी, सालाना ढाई लाख रुपये तक का कुल रिवार्ड दे सकते थे, अब इस लिमिट को बढ़ाकर तीन लाख रुपये कर दिया गया है। दूसरी तरफ आईजी, डीआईजी और कमांडेंट के लिए इनाम देने की कोई सीमा निर्धारित नहीं की गई थी। अब इन अफसरों को एक लिमिट के दायरे में ही इनाम देना होगा।
केंद्रीय गृह मंत्रालय की 'पुलिस 2' डिवीजन द्वारा 19 दिसंबर को जारी कार्यालय ज्ञापन के मुताबिक, अभी तक रिवार्ड देने के मामले में डीजी, एसडीजी/एडीजी, तीनों शीर्ष अधिकारियों के पास एक जैसे वित्तीय अधिकार थे। यानी, ये टॉप बॉस प्रत्येक केस में दस हजार रुपये तक का रिवार्ड दे सकते थे। इसकी सालाना लिमिट ढाई लाख रुपये तय की गई थी। अब नए आदेशों के तहत महानिदेशक और एसडीजी/एडीजी की रिवार्ड देने की वित्तीय शक्तियों में अंतर किया गया है। डीजी को रिवार्ड के प्रत्येक केस में 12 हजार रुपये तक की राशि मंजूर करने की वित्तीय शक्ति प्रदान की गई है। इसकी वार्षिक सीमा तीन लाख रुपये रहेगी।
सीएपीएफ मेंएसडीजी/एडीजी की रिवार्ड देने की वित्तीय शक्ति, प्रत्येक केस में 10 हजार रुपये तय की गई है। इस पर सालाना लिमिट एक लाख रुपये रहेगी, जबकि पहले यह लिमिट ढाई लाख रुपये थी। पहले आईजी, प्रत्येक केस में 25 सौ रुपये का रिवार्ड दे सकते थे। खास बात है कि पहले इसकी कोई सालाना लिमिट नहीं थी। वह कितने भी कार्मिकों को तय राशि का रिवार्ड दे सकता था। अब इसकी लिमिट 50 हजार रुपये वार्षिक कर दी गई है।
डीआईजी के पास, प्रत्येक केस में पांच सौ रुपये तक के रिवार्ड को मंजूरी देने की पावर थी। इस पर सालाना कोई सीमा नहीं थी। अब नए आदेशों के तहत डीआईजी को प्रत्येक केस में एक हजार रुपये तक के रिवार्ड को स्वीकृति देने की पावर दी गई है। पहले इस तरह के रिवार्ड पर कोई सीलिंग नहीं थी। एक साल में कितने भी कार्मिकों को पांच सौ रुपये तक का कैश रिवार्ड दिया जा सकता था। अब इस पर सीलिंग लगा दी गई है। एक साल में डीआईजी स्तर के अधिकारी केवल 30 हजार रुपये तक के रिवार्ड ही मंजूर कर सकते हैं।
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कमांडेंट, पहले तीन सौ रुपये तक के रिवार्ड जारी कर सकता था। इस पर कोई सीलिंग नहीं थी। अब प्रत्येक केस में रिवार्ड राशि, तीन सौ रुपये से बढ़ाकर पांच सौ रुपये कर दी गई है। सालाना, कोई भी कमांडेंट, बीस हजार रुपये से अधिक की राशि के रिवार्ड को मंजूरी नहीं दे सकेंगे।