राजनीतिक संकट से जूझ रहे तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक विधायक दल की नेता शशिकला नटराजन आज शाम राज्य के गवर्नर सी विद्यासागर राव से मुलाकात करेंगी। वो अपने 131 विधायकों का समर्थन भी राज्यपाल के सम्मुख प्रदर्शित कर सकती हैं।
राज्यपाल से बैठक के दौरान विधायक दल की नेता शशिकला राज्य में सरकार बनाने का दावा भी पेश कर सकती हैं। वहीं दूसरी ओर राज्य के कार्यकारी सीएम पनीरसेल्वम भी राज्यपाल के सम्मुख बहुमत का दावा प्रस्तुत कर सकते हैं।
ऐसे में तमिलनाडु के राज्यपाल सी विद्यासागर के सामने ये विकल्प होंगे।
शशिकला से इंतजार करने के लिए कह सकते हैं राज्यपाल
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सुप्रीम कोर्ट जयललिता और उनके संबंधियों से जुड़े 66.65 करोड़ रुपये के आय से अधिक संपत्ति के मामले की सुनवाई कर रहा है। ऐसे में राज्यपाल शशिकला से उक्त मामले में फैसले का इंतजार करने को कह सकते हैं।
कर्नाटक उच्च न्यायालय द्वारा मामले से जयललिता को बरी किए जाने के बाद उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में शशिकला को दोषी मानती हैं तो उन्हें दो सालों तक की जेल हो सकती है।
ऐसे में वो चुनावों के लिए अयोग्य हो सकती हैं। ऐसे में वो तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने के मामले में भी अयोग्य घोषित हो जाएंगी।
शशिकला से सरकार बनाने के लिए कह सकते हैं राज्यपाल
शशिकला
शशिकला, राज्यपाल के सम्मुख एआईडीएमके के 134 में से 131 विधायकों की परेड करा सकती हैं। 234 सीटों की राज्य विधानसभा में सीटों का ये आंकड़ा बहुमत में है।
इसके साथ ही शशिकला विधायकों का समर्थन पत्र भी राज्यपाल के सम्मुख प्रस्तुत कर सकती हैं। ऐसे में शशिकला को सरकार बनाने का न्योता भी राज्यपाल दे सकते हैं।
जिसमें उन्हें सदन के सम्मुख बहुमत सिद्ध करना होगा।
पनीरसेल्वम का सरकार बनाने का दावा भी स्वीकार कर सकते हैं राज्यपाल
अगर पनीरसेल्वम सरकार बनाने का दावा पेश करते हैं तो राज्यपाल उनके इस दावे को भी स्वीकार कर सकते हैं। इस स्थिति में पनीरसेल्वम से अपना बहुमत सिद्ध करने के लिए कहा जा सकता है।
हालांकि ये तभी संभव है जब पनीरसेल्वम अपना इस्तीफा वापस ले लेते हैं। राज्यपाल पनीरसेल्वम की उस दलील को भी स्वीकार कर सकते हैं जिसमें उन्होंने शशिकला गुट पर जबरन इस्तीफा दिलवाने का आरोप लगाया है।
राज्यपाल को ये कदम राजनीतिक पार्टियों और आलोचकों की कड़ी आलोचनाओं का शिकार होते हुए उठाना होगा।
राज्य में लग सकता है राष्ट्रपति शासन
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राज्य में अगर सरकार बनाने की स्थिति पैदा नहीं होती है तो राज्यपाल इस राजनीतिक संकट को देखते हुए राष्ट्रपति शासन की सिफारिश भी कर सकते हैं।
साथ ही वो आय से संपत्ति मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर सकते हैं। इस राजनीतिक संकट में वो कानूनी राय लेते हुए राज्य में राजनीति की साफ तस्वीर होने के बाद ही ऐसा फैसला करने की स्थिति में होंगे।