पूसा मनोहारी (हाईब्रिड 8-11)
पूसा मनोहारी आम को संकर किस्म आम्रपाली और लाल सुंदरी आमों की विशेषताओं के संकरण से बनाया गया है। आम के बौर लगने के समय आमों में लगने वाला गुच्छा रोग आम की फसल को भारी नुकसान पहुंचाता है, लेकिन यह नई किस्म इस रोग के प्रति सहनशील (10-15 फीसदी) पाई गई है।
यह भी मध्यम सघन बागवानी वाली आम की फसल है, जो मध्यम आकार (223 ग्राम औसतन) के फल देती है। लगभग दस साल पुराना पेड़ औसतन 58 किलोग्राम फल देता है। इससे अनुमानित तौर पर प्रति हेक्टेयर 16.1 टन की फसल प्राप्त की जा सकती है।
ये फल भी हल्के लाल रंग की आभा लिए हरे-पीले छिलके वाले होते हैं। लेकिन इसका गूदा रेशा रहित नारंगी पीला होता है, जो देखने में काफी अच्छा लगता है। इन फलों की मिठास क्षमता (20.38 डिग्री ब्रिक्स), अम्लता (0.27 प्रतिशत), एस्कोर्बिक अम्ल (39.78 मिलीग्राम प्रति 100 ग्राम गूदा), बीटा कैरोटीन (9.73 मिलीग्राम प्रति एक किलोग्राम गूदा) होता है।
फलों के बाजार में भारत की स्थिति
केंद्र सरकार की नीतियों के कारण बागवानी क्षेत्र में भारत ने 2013-14 के बाद से बहुत अच्छी प्रगति की है। 2018-19 में 2.543 करोड़ हेक्टेयर भूक्षेत्र में बागवानी की खेती हुई है जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इस वर्ष 31.074 करोड़ टन उत्पादन का लक्ष्य प्राप्त किया गया।
वर्तमान समय में भारत फलों-सब्जियों के निर्यात के मामले में चीन के बाद दूसरे नंबर पर है। वर्तमान में देश फलों का उत्पादन 9.797 करोड़ टन और सब्जियों का उत्पादन 18.317 करोड़ टन प्रति वर्ष है। भारतीय कृषि वैज्ञानिकों द्वारा पैदा की गई नई-नई फलों-सब्जियों के कारण यह लक्ष्य प्राप्त किया जा सका है।