फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कुछ कंडोम के एड अश्लील फिल्मों की तरह, युवाओं के दिमाग पर डालते हैं बुरा असर: हाईकोर्ट

Sat, 28 Nov 2020 06:23 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
विज्ञापन
मद्रास हाईकोर्ट - फोटो : social media
विज्ञापन

मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै खंडपीठ ने टीवी पर चल रहे अश्लील विज्ञापनों को लेकर एक सख्त टिप्पणी की है। एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मद्रास हाई कोर्ट की जस्टिस एन. किरुबाकरन और बी. पुगलेंधी की बेंच ने कहा, बेहद हैरान करने वाली बात यह कि रात 10 बजे के आसपास करीब-करीब हर टीवी चैनल पर एक ही तरह के विज्ञापन आ रहे होते हैं जिसे देखने के बाद लगता है कि यह तो बेहद ही अश्लील किस्म के हैं।

विज्ञापन


इन्हें प्रचलित तौर पर लव ड्रग्स कहा जाता है। और ये अश्लील फिल्म से कम भी नहीं हैं। इसे आप परिवार के साथ नहीं देख सकते हैं। बेंच ने कहा कि इसपर ध्यान देने की जरूरत है।  

युवाओं के दिमाग पर बुरा असर
कोर्ट ने कहा कि टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाले कुछ कंडोम के विज्ञापन तो अश्लील फिल्मों की तरह दिखते हैं और युवाओं के दिमाग पर बुरा असर डालते हैं। युवा गुमराह भी हो सकते हैं। ऐसे विज्ञापनों पर चिंता जाहिर करते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसे विज्ञापन महिलाओं को इस तरीके से चित्रित करते हैं जो शालीनता और मानदंडों का उल्लंघन करते हैं।
विज्ञापन


बेंच ने कहा कि कंडोम की बिक्री को बढ़ावा देने के लिए इस तरह के विज्ञापन में नग्नता होती है। ऐसी सामग्री केबल टेलीविजन नेटवर्क नियम, 1994 और केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 के प्रावधानों का उल्लंघन करती है।

शालीनता के स्थापित मानदंडों के भीतर हो विज्ञापन
कोर्ट ने कहा कि इस पर ध्यान देने की जरूरत है कि इस तरह के अश्लील विज्ञापनों के द्वारा कंटेट नियमों का उल्लंघन ना हो। कोर्ट ने कहा कि केबल ऑपरेटर ये सुनिश्चित करें कि महिलाओं का चित्रण सही तरीके से किए जाएं।  

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें