देश भर में दवाओं, इंजेक्शन और वैक्सीन की गुणवत्ता की जांच के लिए केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से अभी तक का सबसे बड़ा सैंपल सर्वे कराया गया है। देश भर से 47 हजार दवाओं के नमूने उठाए गए और उसकी जांच की गई।
अभी तक की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि करीब 10 दवाओं में गुणवत्ता से समझौता किया गया है। यही नहीं कुछ ऐसी कंपनियों की दवा भी बाजार में मिली है जिस दवा कंपनी का लाइसेंस रद्द किया जा चुका है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पहली बार इतने बड़े स्तर पर दवाओं का सैंपल सर्वे लिया गया है और वैज्ञानिक तरीके से उन दवाओं की गुणवत्ता की जांच की जा रही है। इतने बड़े स्तर पर इकट्ठा किए गए दवाओं के नमूनों को केन्द्र सरकार की सात प्रयोगशालाओं के अलावा राज्य सरकारों की लैब और एक अन्य लैब में वैज्ञानिक तरिके से जांच की गई। जांच रिपोर्ट को अभी एनालिसिस किया जा रहा है अगस्त-2016 तक अंतिम रिपोर्ट आ जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि सबसे पहले दवाओं के सैंपल को नोएडा के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोलॉजिकल (एनआईबी) में इकट्ठा किया गया। इसके बाद दवाओं की बार कोडिंग की गई। ताकि जांच करने वाले को यह यह पता न चल पाए किस दवा को किस जगह से उठाया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने बताया कि दवा के नमूनों को उठाने के लिए इंडियन स्टैटिकल इंस्टीट्यूट में डिजाइन तैयार की गई कि कैसे दवाओं के नमूनों को उठाना है।
जिन लोगों को दवाओं के सैंपल उठाने की जिम्मेदारी दी गई थी उन्हें एक दिन पहले तक पता नहीं होता था कि उन्हें कहां-कहां से नमूने उठाने हैं। जिस जगह से नमूने उठाने होते थे इसकी जानकारी सिलबंद लिफाफे में उसी दिन दी जाती थी।
दवा के नमूने बड़े-बड़े मेट्रों शहरों के अलावा कॉरपोरेट अस्पतालों और गांव-कस्बों से भी लिए गए हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, बड़े-छोटे सरकारी अस्पताल और दवा बनाने वाली कंपनियों के फैक्ट्री से भी सीधे नमूने उठाए गए हैं।