भारत में करीब डेढ़ लाख बच्चे हृदय रोग के साथ पैदा होते हैं, इनमें से केवल 20,000 शिशुओं के परिवार ही उनका इलाज कराने में सक्षम होते हैं। जो लोग इस इलाज को नहीं करवा सकते उन लोगों पर क्या बीतती होगी, इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं। वे चाहकर भी अपने बच्चे का इलाज नहीं करा पाते हैं। हर शिशु को इलाज मिले, वह स्वस्थ्य रहें और खुशहाल रहें, इसी मकसद के साथ दि हंस फाउंडेशन चला रहा है लिटिल हार्ट्स प्रोग्राम। यह कार्यक्रम उन नन्हें शिशुओं को समर्पित है, जिनके माता-पिता इलाज कराने में आर्थिक रूप से सक्षम नहीं हैं। इन्हीं में से एक हैं- अदिति, जिनके परिवार से अमर उजाला की मुलाकात हुई।
अदिति की मां अनु ने अमर उजाला को बताया कि उनकी बेटी जब एक महीने की थी, तब उसे बुखार आया था। इसके बाद अनु बेटी को डॉक्टर के पास लेकर गईं, डॉक्टर ने बताया कि अदिति के हार्ट में प्रॉब्लम है। परेशान मां अनु मंदिर गईं तो पुजारी ने उन्हें दि हंस फाउंडेशन के बारे में बताया। इसके बाद कैंप लगा और अनु बेटी को कैंप में ले गईं, जिसके बाद अदिति की रिपोर्ट दिल्ली भेजी गई। अनु ने बताया कि दि हंस फाउंडेशन के शोभित शर्मा, श्रुति और जगपाल शर्मा ने उनकी काफी मदद की। अदिति को इलाज के लिए मुंबई भेजा गया।
अदिति के पिता से जब पूछा गया कि उनकी बेटी के हार्ट ट्रीटमेंट पर कितना खर्च आया और वह कैसे दिया गया तो उन्होंने बताया कि पूरे इलाज पर 9 से 10 लाख खर्च आया। उन्होंने बताया कि इलाज पर हुआ पूरा खर्च दि हंस फाउंडेशन ने ही उठाया। उन्होंने दि हंस फाउंडेशन का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि इसी संस्था की वजह से आज उनके जीवन में खुशियां लौटी हैं। अदिति अब ठीक है और हमारा परिवार बेहद खुश है।