द हंस फाउंडेशन ने केरल सरकार एवं द बनयान और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस के साथ मिलकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है। इस पहल का उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है, जो मानसिक बीमारी से ठीक हो चुके हैं और बीमारी से उबरने के बावजूद राज्य के मानसिक स्वास्थ्य केंद्रों में रह रहे क्योंकि उनके पास पुनर्वास जैसी सुविधा उपलब्ध नहीं है।
मानसिक केंद्रों से बाहर निकलने के बाद उनकी देखभाल एवं पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी। जिससे बीमारी से ठीक हो चुके लोगों को केरल के नए पुनर्वास घरों में नियमित जीवन जीने का मौका मिले। इस एमओयू पर द हंस फाउंडेशन के सीईओ जनरल मेहता के अतिरिक्त केरल के स्वास्थ्य विभाग के मुख्य सचिव और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेस और द बनयान के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता द्वारा हस्ताक्षर किए गए।
द हंस फाउंडेशन इस कार्यक्रम का भागीदार एवं दानकर्ता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य वाले व्यक्तियों को परिणत करना है, व्यक्तियों को उनके मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक पृष्ठभूमि, वित्तीय संसाधनों के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा एवं इस कार्यक्रम के माध्यम से उनका सहयोग किया जाएगा। इस कार्य हेतु द हंस फाउंडेशन करीब 4 करोड़ रुपये देकर मदद करेगी।
यह परियोजना स्वास्थ्य विभाग और द हंस फाउंडेशन की संयुक्त पहल है। इस अवसर पर राज्य सरकार और अन्य संगठनों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) का आदान-प्रदान किया गया। चेन्नई स्थित मानसिक स्वास्थ्य एवं गैर सरकारी संगठन और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) के साथ मिलकर (प्यार का घर) नामक पुनर्वास की स्थापना स्वास्थ्य राज्य के विभाग आरोग्य केरलम ने की है।
मल्लपुरम और कोझिकोड में स्थापित घरों में, पहले चरण में 100 लोग होंगे। वर्तमान में, लगभग 300 लोग हैं जो विभिन्न सरकारी अस्पतालों में मानसिक बीमारी से ठीक हो चुके हैं, लेकिन जो अस्पताल से बाहर आने और एक नियमित जीवन जीने में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि उनके पास रहने के लिए कोई अन्य स्थान नहीं है। इस एमओयू को केरल के मुख्यमंत्री की उपस्थिति में मंगलवार (13 मार्च) को साइन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन त्रिवेंद्रम में किया गया, जहां 100 से भी ज्यादा स्थानीय लोग भी मौजूद थे।