राज्यसभा में उपसभापति का चुनाव पूरी तरह बीजद के रुख पर निर्भर करेगा। पार्टी यदि खुद का उम्मीदवार उतारती है तो फिर अगला उपसभापति गैर भाजपाई-गैर कांग्रेसी होगा। बीजद उम्मीदवार के लिए दोनों ही खेमे सर्वसम्मति बना सकते हैं। यदि वह एनडीए के साथ जाने को तैयार होता है तो एनडीए उम्मीदवार के तौर पर शिरोमणि अकाली दल के सांसद नरेश गुजराल का रास्ता साफ हो जाएगा। यदि वह विपक्ष को समर्थन देता है तो टीएमसी के सुखेंदु शेखर राय अगले उपसभापति हो सकते हैं।
सत्तापक्ष और विपक्ष के खेमों में उपसभापति को लेकर उठापटक में बीजद के नौ सांसद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ओडिशा में भाजपा और बीजू जनता दल आमने-सामने हैं। बावजूद इसके भाजपा के रणनीतिकार इस कोशिश में हैं कि बीजद अपना उम्मीदवार उतारे या नरेश गुजराल के नाम पर उसका साथ दे। गुजराल के नाम पर एनडीए के साथ-साथ विपक्ष के भी कुछ दल साथ खड़े हो सकते हैं। शिरोमणि अकाली दल के नेता प्रकाश सिंह बादल से चंद्रबाबू नायडू और इनेलो के चौटाला परिवार से भी अच्छे रिश्ते हैं जिसका फायदा भाजपा उठाना चाहती है।
विपक्षी एकता के नाम पर कुर्बानी दे सकती है कांग्रेस
उधर कांग्रेस भी फिलहाल बीजद के रुख को देखना चाहती है। विपक्षी एकता के नाम पर पार्टी ने संकेत दिया है कि उसकी ओर से कोई उम्मीदवारी नहीं है। टीएमसी अपने उम्मीदवार के तौर पर सुखेंदु शेखर राय को उतारना चाहती है। दरअसल टीएमसी विपक्षी दलों के साथ उन नेताओं से भी संपर्क कर रही है जो एनडीए का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में टीडीपी के छह सांसदों का रुख भी महत्वपूर्ण रहेगा।