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भारतीय मोबाइल कंपनियों को 49 हजार करोड़ का प्रोत्साहन, पीएलआई योजना के तहत सरकार करेगी मदद

Wed, 23 Sep 2020 02:49 AM IST
Kuldeep Singh बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Indian mobile company - फोटो : amar ujala
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चीन के साथ जारी तनाव का सीधा लाभ भारतीय मोबाइल निर्माता कंपनियों को मिलने जा रहा है। निर्माण से जुड़े प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के तहत सरकार 49 हजार करोड़ की मदद करेगी। इस कदम से बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी देसी मोबाइल निर्माता कंपनियों को पुनर्जीवन मिलने की संभावना जगी है।

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पीएलआई योजना...चीन से विवाद के बीच सरकार देगी बड़ा अवसर
दरअसल, पिछले कुछ वर्षों में चीन की ओप्पो, वीवो, शाओमी, जियोनी जैसी कंपनियों ने भारत में 5 हजार से 25 हजार तक सस्ते स्मार्टफोन बेचकर डिक्सन, कार्बन, ऑप्टिमस, सोजो, पैजेट और माइक्रोमैक्स जैसी स्थानीय कंपनियों को भारी नुकसान पहुंचाया। संसाधनों की कमी और चीनी कंपनियों से गुणवत्ता व तकनीक में मुकाबला न कर पाने की वजह से इनकी बिक्री काफी कम हो गई और ये कंपनियां बंद होने की कगार पर पहुंच गईं।

समान गुणवत्ता वाले चीनी स्मार्टफोन भारत की अपेक्षा 11 फीसदी तक सस्ते होते हैं। लेकिन सरकार की सख्ती के बाद चीन की कंपनियां अब भारत में विस्तार को लेकर सतर्क हो गई हैं। साथ ही मेक इन इंडिया के तहत आई प्रोत्साहन योजना से भी स्थानीय कंपनियों को दोबारा पांव पसारने में मदद मिलेगी। 22 भारतीय और विदेशी कंपनियों ने योजना का लाभ पाने के लिए आवेदन किया है।
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15 हजार से कम कीमत तो पांच साल तक छूट
पीएलआई योजना की सबसे बड़ी शर्त यह है कि इसमें प्रोत्साहन का लाभ लेने के लिए कंपनियों को 15 हजार से नीचे के फोन बेचने होंगे। इसका पालन करने वाली कंपनियों को पांच वर्षों तक 4-6 फीसदी का नकद प्रोत्साहन मिलेगा। चूंकि, सैमसंग और एपल जैसी कंपनियों के अधिकतर मोबाइल 15 हजार रुपये से ज्यादा कीमत के होते हैं, तो उन्हें इसका लाभ नहीं मिलेगा। योजना की घोषणा के बाद से ही कई अमेरिकी और कोरियाई कंपनियों ने भारतीय कंपनियों से तकनीकी समझौते पर बातचीत भी शुरू कर दी है।

दुनिया का 10 फीसदी मोबाइल भारत मेें बनाने का लक्ष्य
भारत अभी चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता देश है, लेकिन दोनों के बीच भारी अंतर है। विश्व के 90 फीसदी मोबाइल का निर्माण अभी चीन में होता है। बदलते समीकरण के बीच सैमसंग और एपल जैसी कंपनियां चीन से कारोबार को भारत लाने की तैयारी कर रही हैं।

कंपनियों ने अगले पांच साल में वैश्विक मोबाइल निर्माण का 10 फीसदी भारत में करने का लक्ष्य रखा है। पिछले साल देश में 21.9 करोड़ मोबाइल हैंडसेट बने थे। गूगल और रिलायंस जैसी कंपनियां भारत में कम कीमत पर 5जी मोबाइल सेट बेचने की तैयारी कर रही हैं, जिसकी अधिकतर खरीद स्थानीय कंपनियों से ही किए जाने की उम्मीद है।

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