राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) को और आकर्षक बनाने के लिए सरकार ने इसमें कई बड़े बदलावों को अंजाम देना शुरू कर दिया है। एक तरफ इसके खर्च को कम करने के प्रयास किये जा रहे हैं ताकि इसमें खाता खुलवाने वालों को अधिक रिटर्न मिले, तो दूसरी तरफ कोष के प्रबंधन के लिए नए-नए फंड मैनेजरों को जोड़ा जा रहा है ताकि निवेशकों को कोष प्रबंधकों के बीच अधिक विकल्प मिलें।
एनपीएस का प्रबंधन करने वाली एजेंसी पेंशन कोष नियमन एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के अध्यक्ष हेमंत कांट्रेक्टर ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि अधिक से अधिक लोगों को एनपीएस से जोड़ा जा सके, इसके लिए जरूरी है कि यह बाजार में उपलब्ध सभी विकल्पों से बेहतर रिटर्न दे। यह बेहतर रिटर्न तभी दे सकती है, जब इसके प्रबंधन की लागत घटे और रख-रखाव का खर्च कम हो।
उल्लेखनीय है कि एनपीएस को आकर्षक बनाने के लिए सरकार ने भी कई तरह के प्रावधान किए हैं ताकि इसमें निवेश पर लोगों को ज्यादा कर छूट मिल सके। अब आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत इसमें निवेश कर न सिर्फ डेढ़ लाख रुपये तक कर में छूट प्राप्त की जा सकती है बल्कि 80 सीसीडी के तहत 50 हजार रुपये के अतिरिक्त निवेश पर भी छूट मिल सकती है। मतलब है कि कोई व्यक्ति ढाई लाख रुपये की छूट के अलावा इसमें निवेश कर दो लाख रुपये की अतिरिक्त छूट ले सकता है।
एनपीएस का शुल्क होगा कम
सांकेतिक चित्र
कांट्रेक्टर का कहना है कि पहले एनपीएस की एक ही रिकॉर्ड कीपिंग एजेंसी (सीआरए) एनएसडीएल थी। अब बीते 15 फरवरी से कार्वी को भी सीआरए की जिम्मेदारी दे दी गई है। इससे एनएसडीएल के परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट (पीआरए) का वार्षिक शुल्क अभी के 195 रुपये के बदले घट कर 90 रुपये हो जाएगा, जबकि खाता खुलवाते वक्त लिया जाने वाला शुल्क भी 50 रुपये से घट कर 40 रुपये हो जाएगा। ट्रांजेक्शन शुल्क भी 4 रुपये से घट कर 3.75 रुपये हो जाएगा। हालांकि यह शुल्क आगामी एक अप्रैल से लागू होगा। वैसे अभी जो नया खाता खुलवाएंगे, उनका सीआरए कार्वी होगा और उनसे कम शुल्क लिया जाएगा। कार्वी का शुल्क एनएसडीएल के घटे हुए शुल्क से भी प्रतिस्पर्धात्मक है। अगले वित्त वर्ष से ग्राहकों को सीआरए बदलने की भी सुविधा मिलेगी।
नए फंड मैनेजरों की नियुक्ति
कांट्रेक्टर ने बताया कि पहले एनपीएस के महज चार फंड मैनेजर ही थे। इसी साल तीन और फंड मैनेजर नियुक्त किए गए। अभी ग्राहकों को सात फंड मैनेजरों का विकल्प मिल रहा है। शीघ्र ही कुछ और फंड मैनेजरों की नियुक्ति होगी ताकि खाताधारकों को अधिक विकल्प मिल सकें। ज्यादा फंड मैनेजर होने से ग्राहक उन्हीं को चुनेंगे, जिनसे रिटर्न ज्यादा मिल रहा है।
निजी क्षेत्र के खाताधारक 60 फीसदी बढ़े
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पीएफआरडीए के मुताबिक, अप्रैल 2016 से जनवरी 2017 के बीच निजी क्षेत्र के खाताधारकों की संख्या में 60 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और अभी यह संख्या 8.82 लाख तक पहुंच गई है। जिस तरह से इसमें नये खाते खुल रहे हैं, उसे देखते हुए लगता है कि इस साल 31 मार्च तक कम से कम 10 लाख खाताधारक निजी क्षेत्र के होंगे।
इस साल बजट में भी मिली है राहत
एनपीएस को इस साल के बजट में भी टैक्स छूट की सौगात मिली है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एनपीएस से आंशिक निकासी के मामले में 25 फीसदी तक की निकासी को शुल्क मुक्त कर दिया है। उल्लेखनीय है कि खाते की परिपक्वता के समय कोष की कुल रकम में से 40 फीसदी राशि पर कोई कर नहीं लगता है।
सरकारी कर्मचारियों के लिए शुरू हुई थी एनपीएस
एनपीएस को 1 जनवरी, 2004 सेे सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए शुरू किया गया था। बाद में वित्त मंत्रालय को इस योजना के बारे में ढेरों रिप्रेजेंटेशन मिले। उसके बाद मई 2009 में इस योजना के दरवाजे सभी के लिए खुल गए।