फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सरकार ने दी GST संशोधन बिल को मंजूरी, नहीं लगेगा 1 फीसदी मैन्यूफैक्चरिंग टैक्स

Thu, 28 Jul 2016 11:36 AM IST
ब्यूरो, एजेंसी/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
narendra modi - फोटो : Reuters
विज्ञापन
मोदी मंत्रिमंडल ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक में हुए संशोधनों को बुधवार को हरी झंडी दे दी। इसके तहत एक फीसदी मैन्यूफैक्चरिंग टैक्स का प्रावधान हटा दिया गया है। साथ ही जीएसटी लागू होने के पहले पांच साल के दौरान राज्यों को होने वाले राजस्व हानि को पूरा करने की गारंटी भी दे दी गई है। सरकार के इस कदम से जाहिर है कि वह संसद के इसी सत्र में इस विधेयक को पारित कराना चाहती है।
विज्ञापन


प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली कैबिनेट ने बुधवार की अपनी बैठक में जिस संशोधन विधेयक को हरी झंडी दी, उसके तहत जीएसटी को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच किसी भी तरह के विवाद के निपटारे का अधिकार जीएसटी काउंसिल के पास होगा।

इसमें केंद्र और राज्य दोनों के प्रतिनिधि होंगे। कई राज्य जीएसटी लागू करने पर सहमत हैं और अब कैबिनेट से संशोधनों को हरी झंडी मिलने के बाद इस बिल के मौजूदा मानसून सत्र में ही पारित होने की उम्मीद बढ़ गई है।
विज्ञापन

राज्यों को क्षतिपूर्ति की संवैधानिक गारंटी देगा केंद्र

सरकार के एक आला अफसर ने बुधवार को पत्रकारों के सामने जीएसटी संशोधन विधेयक को कैबिनेट की मंजूरी मिलने की सूचना दी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने राज्यों के वित्त मंत्रियों को इस बात का भरोसा दिलाया कि जीएसटी लागू होने की स्थिति में अगले पांच साल तक राज्यों को जो भी राजस्व हानि होगी, उसे केंद्र पूरा करेगा।

जेटली की ओर से राज्यों को मिले इस आश्वासन के बाद ही कैबिनेट ने संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी। मौजूदा बिल (संशोधित बिल से पहले के बिल में) में कहा गया था कि केंद्र पहले तीन साल तक राज्यों को सौ फीसदी क्षतिपूर्ति देगा। इसके बाद अगले दो साल क्रमश: 75 और 50 फीसदी क्षतिपूर्ति देगा।

हालांकि राज्यसभा की सेलेक्ट कमेटी ने पांच साल तक राज्यों को होने वाली हानि की भरपाई के लिए कहा था। अब सेलेक्ट कमेटी की इस सिफारिश को मान लिया गया है। संशोधन के मुताबिक, केंद्र राज्यों को पांच साल तक क्षतिपूर्ति की संवैधानिक गारंटी देगा। इसके साथ ही एक फीसदी का अंतर राज्यीय टैक्स खत्म करके भी सरकार ने कांग्रेस की उन तीन मांगों में से एक को मान लिया है, जिनके आधार पर वह जीएसटी बिल को राज्यसभा में रोके हुए थी।
विज्ञापन

GST को पहली अप्रैल 2017 से लागू करने की योजना

केंद्र सरकार की योजना जीएसटी को पहली अप्रैल 2017 से लागू करने की है और संसद के चालू सत्र में जीएसटी विधेयक पारित कराने के लिए वह व्यापक सहमति बनाने की पूरी कोशिश कर रही है। जीएसटी दर की अधिकतम सीमा तय करने की कांग्रेस की मांग के कारण इसे पारित कराने में विलंब हो रहा है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को राज्य सरकारों के साथ मिलकर व्यापक सहमति बनाई कि संविधान संशोधन में इसकी दरों का उल्लेख नहीं होगा। दरें जीएसटी कानून में होंगी। यह भी सुनिश्चित किया गया कि जीएसटी परिषद द्वारा तय की जाने वाली दरें वर्तमान दरों से कम होंगी।

अर्न्स्ट एंड यंग के नेशनल लीडर (अप्रत्यक्ष कर) हरिशंकर सुब्रह्मण्यम ने कहा, ‘इन संशोधनों से राजनीतिक सहमति बनने के साथ-साथ मानसून सत्र में जीएसटी विधेयक के जल्द पारित होने का रास्ता साफ होगा।’

जीएसटी की नई व्यवस्था में क्या होगा
नई व्यवस्था में एक केंद्रीय जीएसटी या सी-जीएसटी और राज्य जीएसटी या एस-जीएसटी होगा। राज्य अपने क्षेत्र में बेचे जाने वाले सामानों पर बिक्री कर या वैट लगाते हैं और राज्य के बाहर बेचे जाने वाले सामानों पर केंद्रीय बिक्री कर या सीएसटी लगता है। नई व्यवस्था में सीएसटी नहीं होगा और इसकी भरपाई के लिए एक फीसदी के अतिरिक्त कर की व्यवस्था की गई है।

कैसे प्रभावी होगा जीएसटी
संविधान संशोधन होने के कारण जीएसटी विधेयक को संसद में दो तिहाई बहुमत से पारित कराने की जरूरत है। इसके बाद इसे देश के आधे राज्य विधानसभाओं में पारित होना होगा। इसके बाद, लोकसभा और राज्यसभा केंद्रीय जीएसटी बिल पारित करेंगे और राज्यों को अपना जीएसटी बिल पारित करना होगा। फिर जीएसटी परिषद अस्तित्व में आएगा जिसके  अध्यक्ष केंद्रीय वित्त मंत्री होंगे लेकिन केंद्र की वोटिंग हिस्सेदारी एक-तिहाई होगी और परिषद के सभी निर्णय 75 प्रतिशत बहुमत के साथ लिए जाएंगे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें