भारत ने सोमवार को अपने उस आह्वान को फिर दोहराया कि आतंकवाद से प्रभावी रूप से निपटने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र (यूएन) द्वारा वैश्विक समझौते को जल्द पारित करवाया जाए। भारत ने इस समस्या को अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया।
पाकिस्तान की ओर सीधा संकेत करते हुए रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने कहा कि भारत पिछले कई दशकों से ‘छद्म युद्ध’ का शिकार रहा है। आतंकी नेटवर्कों के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में एक एशियाई रुख विकसित किए जाने की जरूरत है।
यूएन द्वारा भारत के समर्थन वाले समग्र अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद समझौते (सीसीआईटी) को शीघ्र पारित करवाने का आह्वान करते हुए परिकर ने कहा कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए सबसे व्यापक एवं गंभीर चुनौती बना हुआ है तथा इससे निपटने के लिए एकीकृत रुख अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने रक्षा अध्ययन एवं विश्लेषण संस्थान में आतंकवाद से निपटने के विषय पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।