शिवसेना की वरिष्ठ नेता का कहना है कि उनकी पार्टी पुणे नगर निगम में अच्छी संख्या में सीटें हासिल करेगी। यह नगर निकाय में निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए पर्याप्त होंगी। महायुति सरकार का घटक दल, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना, 165 सदस्यीय पुणे नगर निकाय के 15 जनवरी को होने वाले चुनावों में अलग से चुनाव लड़ रही है, क्योंकि सीट बंटवारे पर असहमति के कारण उसके सहयोगी भाजपा के साथ गठबंधन नहीं हो सका।
शिवसेना सभी वार्ड के मतदाताओं तक पहुंच रही है- गोरहे
भरोसा था कि पुणे में शिवसेना और भाजपा का गठबंधन होगा
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गोरहे ने बताया कि 12 सीटों में से 7 सीटें ऐसे क्षेत्रों से थीं जहां भाजपा और शिवसेना को अतीत में लगातार हार का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा, "हम गरिमा और समान दर्जे वाला गठबंधन चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, जिसके चलते हमने अपने उम्मीदवार खड़े करने का फैसला किया। अकेले चुनाव लड़ने से शिवसेना को अपनी ताकत का आकलन करने और मतदाताओं का विश्वास जीतने का मौका मिला है।"
जो हमारे एजेंडे को स्वीकार करेगा, उनके साथ हम गठबंधन के लिए तैयार
हालांकि, गोरहे ने कहा कि वे किसी भी ऐसे व्यक्ति के साथ गठबंधन करने के लिए तैयार हैं जो पहाड़ियों को बचाने, पर्यावरणीय संतुलन का समर्थन करने, सतत विकास लक्ष्यों और आवास के मुद्दों के बारे में घोषणापत्र में उल्लिखित उनके एजेंडे को स्वीकार करता है। उन्होंने कहा, "हम किसी भी ऐसे व्यक्ति के साथ गठबंधन पर विचार करेंगे जो हमारे एजेंडे को स्वीकार करे। हालांकि, अंतिम निर्णय एकनाथ शिंदे लेगे।"