उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने कहा है कि ड्रोन या मानव रहित विमान (यूएवी) अपनी विनाशक क्षमता के कारण अन्य चुनौतियों से ज्यादा गंभीर हैं। इनकी कम लागत, बहुउपयोगिता और उपलब्धता के चलते आने वाले वर्षों में इनसे कई गुना खतरा बढ़ सकता है।
संयुक्त युद्धक अध्ययन केंद्र के वेबिनार में उन्होंने सैनी ने कहा, ड्रोन जैसा खतरा आने वाले समय में अभूतपूर्व हो सकता है। ऐसे में सेना को इससे निपटने के लिए अभी से योजना बनानी होगी।
ड्रोन से निपटने के लिए स्वार्म प्रौद्योगिकी समेत हार्ड किल और सॉफ्ट किल दोनों तरह के उपाय जरूरी हैं। दुश्मन ड्रोन नष्ट करने के लिए मिसाइल या हथियारों का प्रत्यक्ष इस्तेमाल हार्ड किल है। वहीं, जैमर या लक्ष्य से भटकाने जैसी तकनीक को सॉफ्ट किल कहा जाता है।
सैन्य संसाधनों में आत्मनिर्भर होने की जरूरत
सशस्त्र बलों की सुरक्षा संबंधी जरूरतों पर सैनी ने कहा, बड़ी संख्या में भारतीय सैनिक ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात हैं, जहां तापमान शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला जाता है। स्वदेशी समाधानों की कमी के कारण भारत आज भी सर्दियों के लिए जरूरी कपड़े और उपकरण आयात कर रहा है। उन्होंने कहा, इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रयास करने की जरूरत है। सेना ने आधुनिक हथियारों, गोलाबारूद, रक्षा उपकरणों, कपड़ों और कई अन्य क्षेत्रों में व्यापक बदलाव किया है, लेकिन अब भी काफी कुछ होना बाकी है।