केंद्र सरकार ने एक बड़ा सुधारात्मक कदम उठाते हुए बुधवार को करीब 200 साल पुराने आयुध कारखाना बोर्ड के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी। इसका उद्देश्य आयुध कारखानों की क्षमता बढ़ाने के साथ ही उन्हें प्रतिस्पर्द्धा के लिए तैयार करना है। इसके लिए बोर्ड के तहत संचालित हथियार और असलहा तैयार करने वाली 41 आयुध फैक्टरियों को आपस में विलय करते हुए सात कंपनियों में तब्दील किया जाएगा। केंद्रीय कैबिनेट ने करीब दो दशकों से लंबित इस सुधार प्रक्रिया पर बुधवार को मंजूरी की मुहर लगा दी।
आयुध फैक्ट्री बोर्ड के कर्मचारियों के हितों रक्षा करेगी सरकार
केन्द्र सरकार ने आयुध फैक्ट्री बोर्ड के विलय का निर्णय तो लिया, लेकिन इसके साथ-साथ इसके कर्मचारियों आदि के हितों की रक्षा का पूरा ध्यान रखा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार समूह ए, बी और सी के कर्मचारियों की सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। कर्मचारियों के पेंशन और अन्य भत्ते का वहन केन्द्र सरकार करेगी। केन्द्र सरकार ने निर्णय लिया है कि आगले दो साल तक उत्पादन ईकाई से जुड़े समूह ए,बी और सी के कर्मचारियों की सेवा शर्तों में बिना कोई बदलाव किए इन्हें प्रतिस्थापना के आधार पर बनने वाली सात कारपोरेट कंपनियों में स्थानांतरित किया जाएगा।
सरकार इसकी सफलता को सुनिश्चित करने के लिए कैबिनेट द्वारा लिए जाने वाले निर्णय का आधिकार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में गठित मंत्रियों के समूह को दे दिया है। ताकि वह आयुध निर्माण समेत अन्य क्षेत्र में प्रोफेशनल क्षमता के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण पहल सुनिश्चित की जा सके।