केरल की धरती पर भाजपा की पहली राष्ट्रीय परिषद की बैठक में सूटबूट की पार्टी के आवरण को हटाने और इसकी जगह दरिद्र नारायण की छवि धारण करने की छटपटाहट साफ दिखी। नई छवि को गढ़ने के लिए पार्टी ने सोच समझकर अंत्योदय की बात करने वाले जनसंघ के अध्यक्ष और मुख्य विचारकों में शुमार दीनदयाल उपाध्याय के सौवें जन्म दिवस को चुना। केंद्र और पार्टी शासित राज्यों की गरीब कल्याण से जुड़ी योजनाओं को तेजी से जमीन पर उतारने की रणनीति बनाई। हालांकि इस क्रम में उड़ी में हुए आतंकी हमले से उपजे देशव्यापी आक्रोश को कम करने की मजबूरी में पार्टी को राष्ट्रवाद का भी चोला धारण करना पड़ा।
पूरी तरह से गरीब कल्याण के एजेंडे को केंद्र में रखने की इच्छा होने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सार्वजनिक मंच से तो पार्टी अध्यक्ष को बैठक में पाकिस्तान को कड़ा संदेश देना पड़ा। दरअसल, शुरुआती दौर में भाजपा की छवि शहरी पार्टी के तौर पर थी।
नई सदी के पहले डेढ़ दशक में पार्टी काफी हद तक इस छवि को तोड़ने में कामयाब हुई। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर ने पार्टी को इस छवि से बाहर निकालने में मदद की। मगर इसी दौरान विपक्ष ने उस पर सूट बूट की पार्टी और सरकार का आरोप चस्पा कर दिया।