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सीवेज के गंदे पानी से कोरोना वायरस फैलने का चलेगा पता

Sat, 02 May 2020 05:00 AM IST
संजीव कुमार झा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
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पोलियो कार्यक्रम से सीख लेते हुए सीवेज के गंदे पानी की जांच की जाएगी। इससे पता चलेगा, कोरोना कम्युनिटी में कितना फैला है। अमेरिका के नॉत्रडेम यूनिवर्सिटी के काइले जेम्स बिबी के नेतृत्व में 50 शोधकर्ता इस पर काम कर रहे हैं। 

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आईआईटी, गांधीनगर के अर्थ साइंस विभाग के मनीष कुमार बताते हैं, मौजूदा जांच से कोरोना के फैलने का अंदाजा नहीं होता। लक्षण दिखने में भी तीन से 15 दिन लगते हैं। तब तक बहुत देर हो जाएगी।


ऐसे में अपशिष्ट की जांच कर फैलने का पता आसानी से लगा सकते हैं। पोलियो में ऐसा हो चुका है।  ट्रांजेशनल हेल्थ साइंसेज एंड टेक्नॉलॉजी इंस्टीट्यूट, फरीदाबाद की ईडी गगनदीप कांग बताती हैं कि अपशिष्टों की जांच से बहुत कुछ संभव है और पोलियो की तर्ज पर ही इसे देशभर में लागू करना चाहिए। 

 आईआईटी और जेएनयू को भेजा प्रोटोकॉल...

मनीष ने बताया कि उन्होंने आईआईटी चेन्नई, रूड़की, गुवाहाटी और जेएनयू दिल्ली को सैंपलिंग का प्रोटोकाल भेजा है। गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्डऔर गुजरात स्टेट बायोटेक्नोलॉजी मिशन उनकी पूरी मदद कर रहा है।

आरएनए की पहचान

विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना से संक्रमित मल या पेशाब त्याग करेगा तो उसमें कोरोना की मौजूदगी का पता लगाना संभव है और इसकी पहचान क्षेत्रवार गंदे पानी की जांच से संभव है। मनीष कहते हैं कि हम गंदे पानी के सैंपल से जिंदा कोरोना वायरस को तो नहीं पकड़ सकते लेकिन उसके आरएनए की पहचान हो सकती है जिसकी जीन सीक्वेंसिंग से ये पता किया जा सकता है कि कोरोना का जेनेटिक मटेरियल पानी में कितना है।

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