उत्तराखंड और मणिपुर राज्यों से कांग्रेस की सरकार जाने के बाद भी पार्टी को अपने से अधिक विपक्ष की मजबूती की चिंता है। वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर के विपक्षी दलों के महागठबंधन और कांग्रेस के अतिरिक्त अन्य दलों की लीडरशिप को भी मजबूत करने की नसीहत के बाद महासचिव सीपी. जोशी ने भी उसी सोच पर मुहर लगा दी है। जोशी का मानना है कि देश के बदलते नैरेटिव में सभी विपक्षी दलों को उसमें बिहार की तर्ज पर यूपी की सपा और बसपा को भी एक साथ आकर 2019 की चुनौती का सामना करना चाहिए।
मणिपुर में सबसे बड़े दल होने के बाद भी कांग्रेस की सरकार न बन पाने के कारण बताने के लिए राज्य के प्रभारी सीपी. जोशी बृहस्पतिवार को मीडिया से रूबरू हुए। जोशी मानते हैं कि 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सामना करने और राज्यों में भाजपा को रोकने के लिए सभी को मिलना होगा। जोशी भी कतई मानने को तैयार नहीं हैं कि पार्टी में किसी भी नेता को राहुल के नेतृत्व में कोई दिक्कत है।
जोशी को कहना है कि मणिपुर में जिस तरह से संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति ने पक्षपात किया है दुखद अध्याय है। इस तरह के बनावटी बहुमत संसदीय लोकतंत्र को कमजोर करेगा जो राजनीतिक दलों के लिए भी चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि नतीजे आने के बाद कांग्रेस 28 विधायकों के कांग्रेस के साथ एक निर्दलीय और एक टीएमसी विधायक भी था। बाद में कांग्रेस का भी एक विधायक उनके साथ चला गया। उनका आरोप है भाजपा ने विधायक दल का नेता भी चुना था और राज्यपाल ने उन्हें बुला लिया था।
वहीं निर्दलीय विधायक को सीआईएसएफ ने इंफाल एयरपोर्ट में हिरासत में लेकर वापस गुवाहाटी भेज दिया। उनका आरोप है कि भाजपा ने जिस एनपीएफ को लेकर सरकार बनाई उसने पहले ही उपमुख्यमंत्री पद और मंत्रियों के विभाग तय करा लिए थे। राज्यपाल ने वहां भाजपा की सरकार को शपथ तो दिला है लेकिन बहुमत हासिल करने की तारीख तय नहीं की है।