उधर, कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित की गई समिति के चारों सदस्य 'काले कृषि कानूनों के पक्षधर' हैं। पार्टी ने दावा किया कि इस समिति से किसानों को न्याय नहीं मिल सकता है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह भी कहा कि इस मामले का एकमात्र समाधान तीनों कृषि कानूनों का रद्द करना है।
सुरजेवाला ने दावा किया कि समिति के इन चारों सदस्यों ने इन कृषि कानूनों का अलग अलग मौकों पर खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने सवाल किया, 'जब समिति के चारों सदस्य पहले से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खेत-खलिहान को बेचने की उनकी साजिश के साथ खड़े हैं तो फिर ऐसी समिति किसानों के साथ कैसे न्याय करेगी?'
उन्होंने कहा, हमें नहीं मालूम कि अदालत को इन लोगों के बारे में पहले बताया गया था या नहीं? वैसे, किसान इन कानूनों को लेकर उच्चतम न्यायालय नहीं गए थे। इनमें से एक सदस्य भूपिंदर सिंह उच्चतम न्यायालय गए थे। मामला दायर करने वाला ही समिति में कैसे हो सकता है? इन चारों व्यक्तियों की पृष्ठभूमि की जांच क्यों नहीं की गई?