केंद्र सरकार ने चुनावी बॉन्ड (इलेक्टोरल बॉन्ड) जारी करने पर चुनाव आयोग द्वारा चिंता जताने का विरोध किया। सरकार ने इस संबंध में कानून में बदलाव को सुप्रीम कोर्ट में उचित ठहराया। साथ ही कहा कि यह चुनावी चंदे में पारदर्शिता लाने, जवाबदेही और चुनाव सुधार के मामले में महत्वपूर्ण कदम था।
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को कहा कि वह चुनावी चंदे के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर 5 अप्रैल को सुनवाई करेगी।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल ताजा हलफनामे में कहा है कि पहले चुनावी चंदे के लिए बड़े पैमाने पर नकदी का लेनदेन होता था। चुनावों में चंदे के रूप में अवैध लेनदेन और काले धन का इस्तेमाल किया जाता था। चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कानूनों में बदलाव का पारदर्शिता पर हानिकारक असर होगा।