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लव बर्ड्स से डरी केंद्र सरकार ने दिखाया उन्हें बाहर का रास्ता

Thu, 11 Oct 2018 04:24 PM IST
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
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प्यार हो या सौदा उसका असर पहले मासूम लड़की के आंचल में आकर गिरता है। जी हां, ऐसे लव बर्ड्स जोड़ों से केंद्र सरकार भी परेशान हो गई तो सौ से अधिक युवक, युवतियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। कुछ तो युवा आपस में पनपे प्रेम के कारण नौकरी से बाहर हुए तो कुछ युवतियों को साहब के पद से हटने या स्थानांतरण के बाद हटा दिया गया। ये युवा बाहर हुए तो इनको लेकर अधिकारियों की जुबान पर भी कई नई कहानियां आ गई हैं। मसलन, जब से मंत्रालय की कांट्रैक्ट पर आई कर्मचारी की छुट्टी हुई है, साहब का मन लग रहा है।

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यह भी एक मी-2 जैसा मामला है। जाने कब इसके रहस्य बाहर आएंगे, लेकिन इस दौरान बहुत कुछ हुआ। कुसुम (बदला) हुआ नाम। बहुत खोजने पर मिली कुसुम। कुसुम की कहानी पेट्रोलियम मंत्रालय के ही दफ्तरी से मिली थी। एक निदेशक ने रखवाने में भूमिका निभाई थी और समय मिलने पर साहब मंत्रालय से साथ में कहीं अच्छी जगह लंच करने चले जाते थे। 2016 में साहब का तबादला दूसरे मंत्रालय में हो गया तो पहले कुसुम को दूसरे विभाग में भेजा गया और फिर बाहर का रास्ता। कुसुम को अभी तक कोई रोजगार नहीं मिला है। वह सड़क पर है और दफ्तरी से मिली सारी सूचनाओं को तस्दीक करती है। यह एक केस है।

आइए दूसरे केस पर चलते हैं। नवीन और नेहा (दोनों बदला नाम) एक एजेंसी के माध्यम से सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में आए थे। दोनों आफिस असिटेंट। कुछ दिन की नौकरी के बाद नजदीकियां बढ़ गई। लंच के अलावा फुर्सत मिलते ही दोनों मंत्रालय के भवन में ही कहीं मिल जाते थे। दोनों के साहब इससे परेशान रहने लगे। नई सरकार आने के बाद पहले नवीन को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ी और फिर नेहा को भी। राष्ट्रपति भवन में तो पिछले कुछ सालों में सभी कांट्रेक्ट के कर्मचारियों को हटाकर उनके स्थान पर नये 60 से ऊपर स्थायी कर्मचारी रख लिए गए हैं।
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इनकी पीड़ा सुनिए

सुरक्षा अधिकारी हैं। नाम न बताने की शर्त पर सूचना को साझा किया है। मंत्रालय की सुरक्षा में तैनात हैं। मंत्रालय के एक विभाग का केयरटेकर कंट्रैक्ट पर काम कर चुकी महिलाकर्मी को अंदर आने देने के लिए दबाव बनाता है। इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी की पहल पर ही एजेंसी ने अमुक महिला को मंत्रालय के विभाग में तैनाती से हटा लिया था, लेकिन कहते हैं बुढ़ापे के प्रेम में काफी तपिश होती है। यह तपिश जिंदा है और केयर टेकर पर हावी है।

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कब शुरू हुआ था सिलसिला

यूपीए सरकार के समय में सरकारी खर्चों को घटाने, स्थायी कर्मचारी की लॉयबिलिटी से छुटकारा पाने के लिए सरकार ने इस रास्ते को अपनाया था। अभी भी केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में सैकड़ों युवा कांट्रैक्ट के आधार पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सरकारी विभाग सर्विस प्रोवाइडर एजेंसियों के माध्यम से इन युवाओं को मंत्रालय में जगह देते थे। सफाईकर्मी से आफिस अटेंडेंट, सहायक तक के पदों की भर्ती इसी तरह से चली और बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिला, लेकिन अब इनकी संख्या पहले की तुलना में काफी कम हो गई है।

क्यों हटाए गए?

विधि एवं न्याय मंत्रालय के एक एडिशनल सेक्रेटरी कहते हैं कि यह तो करना ही नहीं चाहिए था। कांट्रेक्ट की इस भर्ती से जहां सरकारी फाइलों की गोपनीयता प्रभावित हुई, वहीं कामकाज पर भी असर पड़ा। सूत्र का कहना था कि इन युवाओं के पास कामकाज का प्रशिक्षण था नहीं, इसलिए चल नहीं पाए। दूसरा बड़ा कारण गुणवत्ता के युवा का न होना भी था। कांट्रेक्ट पर ही रखे गए थे और स्थायी होने की उम्मीद कम थी, इसलिए कामकाज में जिम्मेदारी का अभाव था।

एक संयुक्त सचिव का कहना है कि ज्यादातर तो अपना मेल-फीमेल साथी तलाश लिए थे। किसी न किसी बहाने गायब हो जाते थे। सूत्र का कहना है कि ऐसी शिकायतें उन्हीं के विभाग की नहीं हैं, बल्कि कई मंत्रालयों में ऐसी शिकायतें हैं। इसके कारण इन्हें हटाने का निर्णय लेना पड़ा। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सूत्र की माने तो कुछ एक की तो साहब से बहुत अच्छी निभने लगी थी। इसके कारण भी कई को नौकरी गंवानी पड़ी।
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