यूपीए सरकार के समय में सरकारी खर्चों को घटाने, स्थायी कर्मचारी की लॉयबिलिटी से छुटकारा पाने के लिए सरकार ने इस रास्ते को अपनाया था। अभी भी केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में सैकड़ों युवा कांट्रैक्ट के आधार पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सरकारी विभाग सर्विस प्रोवाइडर एजेंसियों के माध्यम से इन युवाओं को मंत्रालय में जगह देते थे। सफाईकर्मी से आफिस अटेंडेंट, सहायक तक के पदों की भर्ती इसी तरह से चली और बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिला, लेकिन अब इनकी संख्या पहले की तुलना में काफी कम हो गई है।
क्यों हटाए गए?
विधि एवं न्याय मंत्रालय के एक एडिशनल सेक्रेटरी कहते हैं कि यह तो करना ही नहीं चाहिए था। कांट्रेक्ट की इस भर्ती से जहां सरकारी फाइलों की गोपनीयता प्रभावित हुई, वहीं कामकाज पर भी असर पड़ा। सूत्र का कहना था कि इन युवाओं के पास कामकाज का प्रशिक्षण था नहीं, इसलिए चल नहीं पाए। दूसरा बड़ा कारण गुणवत्ता के युवा का न होना भी था। कांट्रेक्ट पर ही रखे गए थे और स्थायी होने की उम्मीद कम थी, इसलिए कामकाज में जिम्मेदारी का अभाव था।
एक संयुक्त सचिव का कहना है कि ज्यादातर तो अपना मेल-फीमेल साथी तलाश लिए थे। किसी न किसी बहाने गायब हो जाते थे। सूत्र का कहना है कि ऐसी शिकायतें उन्हीं के विभाग की नहीं हैं, बल्कि कई मंत्रालयों में ऐसी शिकायतें हैं। इसके कारण इन्हें हटाने का निर्णय लेना पड़ा। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सूत्र की माने तो कुछ एक की तो साहब से बहुत अच्छी निभने लगी थी। इसके कारण भी कई को नौकरी गंवानी पड़ी।